नौसेना तीन अप्रैल को युद्धपोत ‘तारागिरी’ को सेवा में करेगी शामिल

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नई दिल्ली, शनिवार, 21 मार्च 2026। सुपरसोनिक मिसाइल समेत अत्याधुनिक हथियारों से लैस युद्धपोत ‘तारागिरी’ को तीन अप्रैल को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाले इस समारोह की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे और यह राष्ट्र के पूर्णतः आत्मनिर्भर नौसैन्य शक्ति बनने की दिशा में किए जा रहे प्रयास का एक सशक्त प्रमाण होगा। नौसेना के प्रवक्ता ने कहा कि प्रोजेक्ट 17ए श्रेणी के चौथे शक्तिशाली प्लेटफॉर्म के रूप में ‘तारागिरी’ केवल एक युद्धपोत नहीं है; यह 6,670 टन का ‘मेक इन इंडिया’ भावना और हमारे स्वदेशी शिपयार्ड की परिष्कृत इंजीनियरिंग क्षमताओं का प्रतीक है। नीलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) का चौथा जहाज और मझगांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा निर्मित तीसरा जहाज ‘तारागिरी’ पिछले साल 28 नवंबर को एमडीएल, मुंबई में नौसेना को सौंप दिया गया था। प्रवक्ता ने कहा, ‘‘भारतीय नौसेना, भारत की समुद्री संप्रभुता के एक निर्णायक समारोह में तीन अप्रैल को अपने नवीनतम स्टील्थ युद्धपोत तारागिरी (एफ41) को सेवा में शामिल करने की तैयारी कर रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘तारागिरी एक संयुक्त डीजल या गैस (सीओडीओजी) प्रणोदन संयंत्र द्वारा संचालित है। युद्धपोत का हथियार भंडार विश्व स्तरीय है। इसमें सतह से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक मिसाइलें, सतह से हवा में मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइलें और एक विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली हैं।’’ ये प्रणालियां अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से निर्बाध रूप से एकीकृत हैं जिससे चालक दल पलक झपकते ही खतरों का जवाब दे सकता है। नौसेना ने कहा कि इसका आकार अधिक सुव्यवस्थित है और इसमें कम ‘रडार क्रॉस-सेक्शन’ है, जिससे यह घातक ‘स्टील्थ’ तकनीक से कार्य करने में सक्षम है। अधिकारियों ने बताया कि 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से बना यह युद्धपोत घरेलू औद्योगिक तंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है।

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