मोदी सरकार का ईरान पर हमलों की निंदा नहीं करना 'नैतिक कायरता': कांग्रेस

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नई दिल्ली, शनिवार, 21 मार्च 2026। कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों और वहां ''सत्ता परिवर्तन कराने की क्रूर कोशिशों'' की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा निंदा नहीं किया जाना भारत के सभ्यतागत मूल्यों की ''नैतिक कायरता'' और ''राजनीतिक विश्वासघात'' को दर्शाता है। कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने युद्धविराम कराने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) और इजराइल के प्रधानमंत्री (बेंजामिन नेतन्याहू) के साथ ''अपनी बहुचर्चित मित्रता का भी इस्तेमाल नहीं किया।'' 

रमेश ने कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हवाई हमले शुरू हुए आज ठीक 21 दिन यानी तीन सप्ताह हो चुके हैं और प्रधानमंत्री को अपने बहुचर्चित इजराइल दौरे से लौटे भी 23 दिन हो चुके हैं। उन्होंने कहा, ''क्या मोदी सरकार ने अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए उस भीषण हवाई हमले की निंदा या आलोचना की या खेद व्यक्त किया है, जिसके कारण अब भारत सहित पूरी दुनिया में गंभीर आर्थिक अस्थिरता पैदा हो गई है? जवाब है-नहीं।'' उन्होंने कहा, ''क्या मोदी सरकार ने अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के शीर्ष नेताओं को लक्ष्य बनाकर उनकी लगातार हत्या किए जाने की निंदा या आलोचना की या खेद व्यक्त किया? जवाब है- नहीं।'' रमेश ने कहा, ''क्या मोदी सरकार ने अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान में शासन परिवर्तन और राज्य को अस्थिर करने की उन क्रूर कोशिशों की निंदा या आलोचना की या खेद व्यक्त किया,जिनकी वजह से ईरान में गृहयुद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है? जवाब है- नहीं।''

उन्होंने कहा, ''क्या मोदी सरकार ने ईरान पर बमबारी और खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों को तुरंत रोकने के लिए कोई गंभीर कूटनीतिक प्रयास और पहल की है? क्या प्रधानमंत्री ने अमेरिका के राष्ट्रपति और इजराइल के प्रधानमंत्री के साथ अपनी बहुत प्रचारित दोस्ती का इस्तेमाल युद्धविराम कराने के लिए किया है? जवाब है-नहीं।''

रमेश ने कहा, ''ये चार 'नहीं'- भारत के सभ्यतागत मूल्यों के प्रति नैतिक कायरता और राजनीतिक विश्वासघात को दर्शाते हैं।'' इस युद्ध के समाप्त होने के कोई संकेत नजर नहीं आ रहे। इजराइल ने कहा है कि शनिवार सुबह भी ईरान उसकी ओर मिसाइलें दागता रहा, जबकि सऊदी अरब ने बताया कि उसने देश के पूर्वी हिस्से में कुछ ही घंटों में 20 ड्रोन मार गिराए। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस हमले में कोई हताहत या नुकसान नहीं हुआ। इस युद्ध में अब तक ईरान में 1,300 से अधिक, लेबनान में 1,000 से ज्यादा, इजराइल में 15 और इस क्षेत्र में 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है। लेबनान और ईरान में लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। 

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