वेतन वृद्धि, अन्य मांगों को लेकर डीटीसी बस चालकों की हड़ताल का पांचवां दिन

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दैनिक मजदूरी बढ़ाने, चिकित्सा सुविधाओं और ओवरटाइम भुगतान की मांग को लेकर दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बस चालकों की हड़ताल शनिवार को पांचवें दिन भी जारी रही और इस दौरान ज्यादातर बसें सड़कों से नदारद रहीं। दिल्ली सरकार के आश्वासन के बावजूद चालकों ने अपना विरोध-प्रदर्शन जारी रखा, जिससे रोजाना सफर करने वालों को परेशानी हुई।

इससे पहले, डीटीसी ने कुछ समय के लिए कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के वास्ते अपने स्थायी वाहन चालकों को तैनात करने का निर्देश दिया था। हालांकि, निजी कंपनियों द्वारा बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसें चलाए जाने के कारण, इस कदम का असर सीमित रहा और बड़ी संख्या में बसें सड़कों पर नहीं चल पाईं। कुछ चालकों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की धमकियों के कारण प्रदर्शनकारियों को काम करने के लिए “मजबूर” किया जा रहा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि बवाना डिपो में एक बस की खिड़की तोड़ दी गई थी।

डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी ने कहा, “सरकार ने फिलहाल डीटीसी के स्थायी चालकों को लगाकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है। लेकिन हमारी संख्या बहुत ज्यादा है, इसलिए इसका कोई असर नहीं होगा। कुछ बसें सड़कों पर हैं, लेकिन हममें से ज्यादातर लोग हड़ताल पर हैं। एक बस की खिड़कियां भी तोड़ी गईं, ताकि हंगामा करने का आरोप हम पर लगाया जा सके।” चालकों और संवाहकों का कहना है कि उन्हें हर दिन 862 रुपये मिलते हैं, जिसमें से 60 रुपये प्रोविडेंट फंड में कट जाते हैं और बाकी रकम उन्हें मिलती है। चालकों ने कहा कि हड़ताल जारी रही, क्योंकि निजी कंपनियों ने उन्हें वेतन बढ़ाने का भरोसा नहीं दिया था। नंद नगरी, रानी खेड़ा, राजघाट, नेहरू प्लेस, बुराड़ी, वजीरपुर, घुम्मनहेड़ा और सरिता विहार समेत कई बस डिपो के चालक हड़ताल पर रहे।

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