धनशोधन मामले में संज्ञान लेने के आदेश को रद्द करने की आईएएस अफसर की याचिका पर 15 सितंबर को सुनवाई

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नई दिल्ली, शनिवार, 12 सितंबर 2026। उच्चतम न्यायालय 15 सितंबर को आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल की याचिका पर सुनवाई करेगा। इस याचिका में झारखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें धनशोधन मामले में संज्ञान लेने वाले आदेश को रद्द करने की उनकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर सकती है। 

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड के खनन विभाग की पूर्व सचिव सिंघल को 11 मई 2022 को गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई केंद्र की प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजना, मनरेगा के कार्यान्वयन में 18 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के सिलसिले में उनसे संबद्ध परिसरों पर छापेमारी के बाद की गई थी। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की 2000 बैच की अधिकारी दो साल से ज्यादा समय तक जेल में थीं, हालांकि जमानत मिलने के बाद उनका निलंबन रद्द कर दिया गया।

उन्होंने ईसीआईआर मामला 03/2018 के सिलसिले में रांची की पीएमएलए अदालत के 19 जुलाई, 2022 के संज्ञान लेने वाले आदेश को रद्द करने का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा था कि धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा-तीन और चार के तहत अपराधों का संज्ञान, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 197 के तहत मंजूरी की जरूरी शर्त का पालन किए बिना लिया गया था। उच्च न्यायालय ने सिंघल की याचिका खारिज करते हुए कहा कि व्यक्तिगत ‘‘गैर-कानूनी कामों’’ से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत पहले से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।

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