राम मंदिर और अन्य स्थानों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की गहन जांच क्यों नहीं की गई : सुले

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नासिक, शनिवार, 11 जुलाई 2026। राकांपा (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने सवाल किया कि अयोध्या, उज्जैन और मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों पर कथित अनियमितताओं की गहन जांच क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि मंदिरों में कथित भ्रष्टाचार सबसे शर्मनाक बात है। एक दिन पहले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार के दौरान प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में कथित "लूट" का मुद्दा उठाया था। नासिक में संवाददाताओं से बात करते हुए सुले ने कहा कि भगवान राम और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों से जुड़े मंदिरों में भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, "अगर मंदिरों में भ्रष्टाचार हो रहा है, तो इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता। अगर आरोप सही हैं, तो मैं कहना चाहूंगी कि यह सबसे गंदी बात है। अयोध्या, उज्जैन और सिद्धिविनायक जैसे धार्मिक स्थलों पर कथित अनियमितताओं के आरोपों की गहन जांच क्यों नहीं की गई?" राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद सात जून को यह विवाद शुरू हुआ था। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो राम मंदिर को चढ़ावे के रूप में मिले नकदी और कीमती सामान की गिनती से जुड़े थे।

शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शप) में अंदरूनी कलह की अटकलों पर पूछे गए सवाल के जवाब में सुले ने कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और अलग-अलग संदर्भों में पार्टी नेताओं द्वारा दिए गए बयानों पर पहले ही स्पष्टीकरण दिया जा चुका है। उन्होंने पार्टी में किसी भी तरह की नाराजगी की अटकलों को खारिज किया। सुले ने कहा, "राकांपा (शप) के सांसद एकजुट हैं। उन्होंने पार्टी में किसी नाराजगी को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण से मुलाकात नहीं की थी। सिर्फ मैंने ही अपनी बेटी की शादी का निमंत्रण देने के लिए उनसे बात की थी।"

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