कांग्रेस विकलांगता पेंशन मामले पर विरोध प्रदर्शन करेगी, संसदीय समिति की बैठक में विषय उठाएंगे राहुल

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नई दिल्ली, बुधवार, 18 फरवरी 2026। कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि यदि सरकार ने सैनिकों के लिए विकलांगता पेंशन को आयकर की छूट से बाहर करने के अपने फैसले को 28 फरवरी तक वापस नहीं लिया तो वह पूर्व सैनिकों को साथ लेकर विशाल विरोध प्रदर्शन करेगी। पार्टी के 'पूर्व सैनिक विभाग' के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) रोहित चौधरी ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बृहस्पतिवार को होने वाली रक्षा मामलों की संसद की स्थायी समिति की बैठक में इस विषय को प्रमुखता से उठाएंगे।

राहुल गांधी इस समिति के सदस्य हैं। समिति की 19 फरवरी की बैठक का एजेंडा वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा मंत्रालय की अनुदान मांगों पर विचार करना है। पूर्व सैनिकों के एक समूह ने बीते नौ फरवरी को इसी विषय पर राहुल गांधी से मुलाकात की थी। चौधरी ने संवाददाताओं से कहा, ''मोदी सरकार का कहना है कि युद्ध में घायल होने के कारण जो सैनिक सेवा से बाहर हैं, सिर्फ उनकी विकलांगता पेंशन को आयकर के दायरे से बाहर रखा जाएगा। वहीं, जो सैनिक घायल होने के बाद भी सेना में सेवा दे रहे हैं, उनकी विकलांगता पेंशन कर के दायरे से बाहर नहीं होगी।''

कांग्रेस नेता का कहना था कि वर्ष 2023 में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि सरकार सैनिकों की विकलांगता पेंशन को आयकर के दायरे में नहीं ला सकती है। चौधरी ने दावा किया, ''मोदी सरकार 2023 में नई विकलांगता नीति लेकर आई और कहा कि अब विकलांगता पेंशन को 'क्षति राहत' (इम्पेयरमेंट्स रिलीफ) कहा जाएगा। जैसे ही सरकार ने नाम बदला विकलांगता पेंशन अपने आप आयकर के दायरे में आ गई। इस तरह सरकार ने सैनिकों के सम्मान को रौंदने का काम किया है।'' उन्होंने कहा, ''हमारे देश में करीब 2 लाख दिव्यांग सैनिक हैं। मोदी सरकार सिर्फ 125 करोड़ रुपये के खर्च को बचाने के लिए देश के सैनिकों के मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ कर रही है।''

कांग्रेस नेता ने कहा, '' सरकार से हमारी मांग है कि आयकर संबंधी छूट को खत्म करने वाले फैसले को वह वापस ले, इम्पेयरमेंट्स रिलीफ वाले फैसले को वापस ले तथा विकलांगता पेंशन में कोई वर्गीकरण नहीं होना चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''हमने नौ फरवरी से 'सेव डिसैबिलिटी पेंशन' अभियान शुरू किया है। अगर सरकार 28 फरवरी तक अपना फैसला वापस नहीं लेती तो एक मार्च को जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा तथा उसके बाद देश भर से पूर्व सैनिक दिल्ली में एकत्र होकर सरकार पर दबाव बनाएंगे।''

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