ओडिशा ने माओवादी आत्मसमर्पण नीति में बदलाव किया
भुवनेश्वर, बुधवार, 11 फरवरी 2026। ओडिशा सरकार ने माओवादियों के लिए अपनी आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति में बदलाव किया है ताकि इसे और बेहतर बनाया जा सके। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। गृह विभाग द्वारा नौ फरवरी को जारी की एक अधिसूचना में कहा गया कि यह नीति सिर्फ माओवादियों और उससे जुड़े संगठनों या उन प्रतिबंधित संगठनों के ज्ञात /चिह्नित कैडर पर लागू होगी, जो हथियारों के साथ या बिना हथियारों के आत्मसमर्पण करते हैं।
इसमें साफ किया गया कि ओडिशा में प्रतिबंधित संगठनों की गतिविधियों में शामिल लोग, चाहे वे राज्य के मूल निवासी हों या नहीं, इस योजना के तहत पात्र होंगे। संशोधित नीति में कहा गया है कि राज्य के बाहर नक्सल गतिविधियों में शामिल ओडिशा के मूल निवासी भी पात्र माने जाएंगे, बशर्ते संबंधित पुलिस अधीक्षक से प्रमाणपत्र लेना होगा और संबंधित राज्य से अनापत्ति प्रमाणपत्र जमा करना होगा ताकि यह पुष्टि हो सके कि उन्होंने कहीं और पुनर्वास लाभ नहीं लिए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि 27 नवंबर 2025 से, कैडर रैंक के आधार पर वित्तीय सहायता की घोषणा के बाद 45 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। नीति के तहत केंद्रीय समिति या पोलित ब्यूरो के सदस्य को 1.1 करोड़ रुपये, राज्य समिति या विशेष क्षेत्रीय समिति के सदस्य को 55 लाख रुपये, क्षेत्रीय समिति के सदस्य को 33 लाख रुपये तथा डिवीजनल समिति सचिव या सैन्य प्लाटून कमांडर को 27.5 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। अन्य कैडर को उनके पद और भूमिका के आधार पर 22 लाख रुपये से 1.65 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है।
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