राज्यपालों पर न्यायालय का फैसला अच्छा है : द्रमुक
चेन्नई, गुरुवार, 20 नवंबर 2025। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने राज्यपालों पर उच्चतम न्यायालय के बृहस्पतिवार के निर्णय को "अच्छा फैसला" बताया और कहा कि यह राज्यपाल पद की शक्तियों से जुड़े दूसरे मामलों में भी काम आएगा। द्रमुक के वरिष्ठ नेता टीकेएस इलानगोवन ने कहा कि अगर तमिलनाडु के लोगों द्वारा चुनी गई राज्य विधानसभा ने कोई प्रस्ताव पास किया है, तो राज्यपाल को उसे स्वीकार करना होगा।
इलानगोवन ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, "अगर उन्हें कुछ ऐसा मिलता है जो संविधान के नियमों के खिलाफ है, तो वे सफाई मांग सकते हैं। वह किसी भी विधेयक को मना नहीं कर सकते। वह यह नहीं कह सकते कि यह विधेयक पारित नहीं हो सकता। उनके पास कोई अधिकार नहीं है।" उन्होंने कहा, "यहां तक कि राष्ट्रपति को विधायक और सांसद चुनते हैं। उपराष्ट्रपति को सांसद चुनते हैं। प्रधानमंत्री भी चुने जाते हैं। राज्यपाल को नियुक्त किया जाता है। इसलिए उनका काम यह देखना है कि विधानसभा से पारित किया गया कोई भी विधेयक संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं।" द्रमुक नेता ने कहा, "राज्यपाल किसी विधेयक पर सिर्फ़ स्पष्टीकरण मांग सकते हैं। वह किसी विधेयक को खारिज नहीं कर सकते।"
उन्होंने आर एन रवि का ज़िक्र करते हुए कहा, "और अगर सरकार कोई सफाई देती है, तो उन्हें उसे मानना होगा। लेकिन यह राज्यपाल अपनी बात पर अड़े हुए हैं।" पूर्व सांसद ने कहा, "उनका इतिहास रहा है कि वह लोगों के लिए नहीं रहे हैं। उन्हें लगता है कि वह राजा हैं। वह राजा नहीं हो सकते। राज्यपाल समझें कि लोकतंत्र में किसी राजा की कोई भूमिका नहीं होती। यह एक अच्छा फैसला है और यह राज्यपाल की शक्तियों के बारे में आगे के मामलों में काम आएगा।"
उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य विधानसभाओं में पारित विधेयकों को मंजूरी देने के संबंध में राज्यपाल एवं राष्ट्रपति के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की जा सकती और न्यायपालिका भी उन्हें मान्य स्वीकृति नहीं दे सकती। प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से कहा कि यदि राज्यपाल को अनुच्छेद 200 (विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने की राज्यपाल की शक्ति) के तहत उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना विधेयकों को रोकने की अनुमति दी जाती है तो यह संघवाद के हित के खिलाफ होगा।
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