भारत सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर ध्यान दे रहा: राजनाथ
नई दिल्ली, मंगलवार, 04 नवम्बर 2026। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत एक मजबूत घरेलू रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर ध्यान दे रहा है, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी सैन्य क्षमताएं बहुत जरूरी हैं। राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक में राजनाथ ने कहा कि सरकार विदेशी स्रोतों पर देश की रणनीतिक निर्भरता में कमी लाने की कोशिशों के तहत घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी तकनीकी क्षमताएं आवश्यक हैं।” बैठक में उभरती सुरक्षा चुनौतियों, युद्ध के बदलते तौर-तरीकों, तकनीकी प्रगति और भविष्य के लिए तैयार, प्रौद्योगिकी से लैस एवं अभियान के लिहाज से चुस्त सेना बनाने की जरूरत पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
विचार-विमर्श के दौरान जिन मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया, उनमें अगली पीढ़ी के सैन्य मंच और हथियार प्रणालियों को शामिल करने की प्रक्रिया में तेजी लाना, तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को मजबूत करना, संयुक्त परिचालन योजना बनाना और क्षमताओं का समन्वित इस्तेमाल सुनिश्चित करना शामिल है। राजनाथ ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि सेना को उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार ने ‘बजट और पूंजी अधिग्रहण’ तथा ‘प्रौद्योगिकी और मानव पूंजी’ जैसे अहम क्षेत्रों में कई कदम उठाए हैं, ताकि सेना को प्रौद्योगिकी-आधारित आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के लिए तैयार किया जा सके। रक्षा मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार आधुनिकीकरण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए बजटीय सहायता और पूंजी अधिग्रहण पर लगातार ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त वित्तीय संसाधनों के साथ-साथ उनका प्रभावी इस्तेमाल और सेवाओं की महत्वपूर्ण जरूरतों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
राजनाथ ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट को बढ़ाकर रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिसमें 2.19 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय शामिल है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए कहा कि रक्षा उत्पादन 2014-15 में 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया। राजनाथ ने बताया कि 2014 में रक्षा निर्यात जहां 2,000 करोड़ रुपये से कम था, वहीं यह अब बढ़कर लगभग 40,000 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा, “2029 तक तीन लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करना हमारा लक्ष्य है।” राजनाथ ने आधुनिक युद्ध में प्रौद्योगिकी की बदलती भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि तकनीकी प्रगति संघर्षों के बदलते स्वरूप का अभिन्न अंग है।
उन्होंने मानव पूंजी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि किसी सेना की ताकत केवल प्रौद्योगिकी और वित्तीय संसाधनों से ही तय नहीं होती, बल्कि उसमें शामिल कर्मियों की क्षमताओं और तैयारियों पर भी निर्भर करती है। रक्षा मंत्री ने कहा, “युद्ध के तेजी से बदलते स्वरूप को देखते हुए यह जरूरी है कि हमारे रक्षा बल आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के अनुरूप खुद को ढालें। इसे ध्यान में रखते हुए तीनों सेनाओं ने लगातार अपनी संरचनाओं और टुकड़ियों में सुधार किया है।” उन्होंने कहा, “भारतीय सेना की नयी टुकड़ियां, जिनमें ‘असनी’, ‘भैरव’ और ‘शक्तिबाण’ प्लाटून शामिल हैं, मौजूदा परिचालन जरूरतों को पूरा करने और युद्धक्षेत्र की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने में बेहद प्रभावी साबित हो रही हैं।”
राजनाथ ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिकीकरण एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और बदलती प्रौद्योगिकियों, सुरक्षा चुनौतियों और नयी जरूरतों को देखते हुए परिचालन संबंधी तैयारियों को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने दीर्घकालिक क्षमताएं विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे रक्षा बल परिचालन के लिहाज से प्रभावी और आत्मनिर्भर बने रह सकें। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में इरादों को अमल में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया और आधुनिकीकरण के लिए एक व्यवस्थित एवं चरणबद्ध दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया गया। मंत्रालय ने कहा कि उसका उद्देश्य एक ऐसी सेना तैयार करना है, जो पारंपरिक, उप-पारंपरिक और बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।
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