अंगदान को लेकर भ्रांतियां दूर करने और जागरूकता फैलाने की जरूरत : उपराष्ट्रपति
नई दिल्ली, रविवार , 01 नवम्बर 2026। उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने रविवार को अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और इसके प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की, ताकि अंगों की प्रतीक्षा में कम से कम लोगों की जान जाए। उन्होंने अंगदान को लेकर अपना निजी अनुभव साझा करते हुए एक अज्ञात व्यक्ति के प्रति आभार भी जताया, जिसने एक दशक पहले उनकी बेटी को अपने यकृत का एक हिस्सा दान किया था। यहां राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल-2026 का उद्घाटन करते हुए उपराष्ट्रपति ने लोगों से अंगदान के बारे में सोच-समझकर निर्णय लेने और अपनी इच्छा परिवार के सदस्यों के साथ साझा करने का आग्रह किया। राधाकृष्णन ने कहा कि अधिक जागरूकता से यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि ज्यादा मरीजों का अंग प्रत्यारोपण हो और अंगों की प्रतीक्षा में कम लोगों की जान जाए। अंगदान को 'महादान' बताते हुए उन्होंने कहा कि यह उदारता का सर्वोच्च कार्य है, जो निस्वार्थ सेवा और समाज के कल्याण के लिए जीने की भारत की सभ्यतागत परंपरा को दर्शाता है।
महर्षि दधीचि के सर्वोच्च बलिदान का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य इस बात में नहीं है कि व्यक्ति क्या प्राप्त करता है, बल्कि इस बात में है कि वह क्या देता है। भारत में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश में 2025 में 20,000 से अधिक अंग प्रत्यारोपण किए गए, जो 2013 में हुए 4,900 प्रत्यारोपण की तुलना में चार गुना से भी अधिक हैं। अंग प्रत्यारोपण की कुल संख्या के मामले में भारत अब दुनिया में तीसरे स्थान पर है। देश में 2025 में मृत अंगदाताओं की संख्या भी 1,200 से अधिक रही, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा है। उपराष्ट्रपति ने अंगदान अभियान को गति देने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में बार-बार की गई अपीलों को दिया।
उन्होंने मृत अंगदाताओं और उनके परिवारों के साथ-साथ जीवित अंगदाताओं को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि एक मृत अंगदाता आठ लोगों तक की जान बचा सकता है। उन्होंने तमिलनाडु की एक घटना का भी उल्लेख किया, जहां एक अंगदाता के सात अंग सात अलग-अलग मरीजों को दिए गए थे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल केवल एक खेल आयोजन नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए अंग प्रत्यारोपण करा चुके लोगों के साहस और उपलब्धियों का जश्न मनाया जाता है तथा स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के योगदान को भी सम्मान दिया जाता है। राधाकृष्णन ने कहा कि ये खेल अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को प्रेरित करेंगे और यह दिखाएंगे कि प्रत्यारोपण के बाद का जीवन भी संभावनाओं से भरा हो सकता है।
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