आतंकवाद जैसी चुनौतियां सीमाओं तक सीमति नहीं, संवाद और संसदीय सहयोग जरूरी: बिरला

img

नई दिल्ली, सोमवार, 27 अक्टूबर 2026। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को कहा कि वैश्विक संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का प्रभाव किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहता और इनसे निपटने में संवाद, कूटनीति तथा संसदीय सहयोग महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संविधान सदन में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि विभिन्न देशों की संसदें आपसी समझ और विश्वास को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय तनाव कम करने तथा वैश्विक चुनौतियों के शांतिपूर्ण समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत में उनकी उपस्थिति ब्रिक्स संसदीय सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता, संवाद, पारस्परिक सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास को दर्शाती है।

बिरला ने कहा, ‘‘ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है और संगठन का तेजी से विस्तार हो रहा है। वैश्विक घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करने की इस मंच की क्षमता भी लगातार बढ़ रही है।’’ उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, विश्व के लगभग एक-तिहाई भू-क्षेत्र में फैले हैं तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि ब्रिक्स देशों में भौगोलिक, सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक विविधता है, लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता के प्रति साझा जिम्मेदारी उन्हें एक सूत्र में बांधती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में नयी दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन में संयुक्त वक्तव्य को सर्वसम्मति से स्वीकार किए जाने को बड़ी उपलब्धि बताया।

बिरला ने कहा कि अब आवश्यकता इन प्रतिबद्धताओं को ठोस परिणामों में बदलने की है। उन्होंने कहा कि कानून निर्माण, बजट, विचार-विमर्श और निगरानी के माध्यम से संसदें इन प्रतिबद्धताओं को लागू करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया क्षेत्रीय संघर्षों, युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक तनाव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इन चुनौतियों का प्रभाव किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहता।

बिरला ने कहा, ‘‘ऐसे समय में संवाद, कूटनीति और आपसी सहयोग का महत्व और भी बढ़ जाता है।’’ उन्होंने कहा कि संसदें संवाद और सहयोग के माध्यम से देशों के बीच विश्वास बढ़ाने तथा मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ कहा जाता है और उसका लोकतंत्र संवाद, वैचारिक भिन्नता तथा सहमति-असहमति के बावजूद परस्पर सम्मान की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारत की संसद ने अपने विधायी ढांचे का उपयोग ऐसी नीतियां और कानून बनाने के लिए किया है, जिन्होंने देश की बहुआयामी प्रगति के लिए ठोस आधार तैयार किया है।

बिरला के मुताबिक, ब्रिक्स ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को सशक्त बनाने की आकांक्षा रखता है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना होगा कि ये आकांक्षाएं केवल विमर्श तक सीमित न रहें, बल्कि ठोस नीतियों और व्यावहारिक सहयोग में भी दिखाई दें। उन्होंने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के विषय ‘‘जन-केंद्रित विकास हेतु संसदों को सुदृढ़ बनाना’’ का उल्लेख करते हुए कहा कि दो दिनों के दौरान लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास जैसे विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा।

बिरला ने कहा कि संसदों को ऐसी सुदृढ़ संस्थाओं के रूप में विकसित करना होगा, जो चुनौतियों के बीच विधायी निरंतरता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक निगरानी सुनिश्चित कर सकें। उन्होंने कहा कि संसदों को जन-अपेक्षाओं के अनुरूप खुद को ढालने और कार्यप्रणाली में नवाचार अपनाने की जरूरत है।

उन्होंने इस बात का आह्वान किया कि संसदीय संदर्भ में नवाचार का अर्थ लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी, सहभागी और जन-केंद्रित बनाने के लिए नए विचारों तथा कार्यपद्धतियों को अपनाना भी है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स को ‘‘समाधानों का इकोसिस्टम’’ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। समूह की सफलता केवल चर्चाओं से नहीं, बल्कि उनसे उत्पन्न ठोस परिणामों से मापी जाएगी। बिरला ने कहा कि राष्ट्रीय परिस्थितियां और दृष्टिकोण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन ब्रिक्स देशों की आकांक्षाएं समान हैं और वे शांति, सुरक्षा, परस्पर सम्मान, समान अवसर तथा नागरिकों के लिए बेहतर जीवन की हैं।

उन्होंने युवाओं की आकांक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान युवा पीढ़ी के पास शिक्षा और तकनीकी ज्ञान है तथा उसे उसकी प्रतिभा के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है तथा संसदों का दायित्व है कि वे युवाओं की आवाज को स्थान दें और उनकी प्रतिभा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ें। बिरला ने उम्मीद जताई कि ब्रिक्स संसदीय मंच-2026 आपसी विश्वास और सहयोग को नई दिशा देगा तथा अधिक समावेशी, शांतिपूर्ण और सतत विश्व के निर्माण में सार्थक योगदान करेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पर एक अलग पोस्ट में बिरला के एक लेख को साझा किया, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों के बीच संवाद एवं सहयोग मजबूत करने में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की भूमिका को रेखांकित किया गया है।

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है, इसलिए यह वैश्विक और क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान समूह ने ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ विषय पर केंद्रित ‘जन-केंद्रित और मानवता प्रथम’ दृष्टिकोण अपनाया। 

हरिवंश ने कहा कि मोदी ने ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने के लिए ब्रिक्स के विस्तार की पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप नयी दिल्ली घोषणा-पत्र सामने आया। यह घोषणा-पत्र वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन करता है। उन्होंने सदस्य देशों से समावेशिता को बढ़ावा देने, अपनी क्षमताओं का साझा उपयोग करने और वैश्विक प्रगति के लिए साझेदारी मजबूत करने का आह्वान किया। भारत ने जून 2025 में ब्रासीलिया में आयोजित 11वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान इसकी अध्यक्षता संभाली थी। उस समय बिरला को 12वें मंच का अध्यक्ष नामित किया गया था।

Similar Post

LIFESTYLE

AUTOMOBILES

Recent Articles

Facebook Like

Subscribe

FLICKER IMAGES

Advertisement