वैश्विक संकटों पर मूकदर्शक नहीं, नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाए संयुक्त राष्ट्र : जयशंकर

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नई दिल्ली, रविवार, 25 अक्टूबर 2026। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक संकटों के दौरान ‘‘मूकदर्शक’’ बने रहने के बजाय नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए। दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि इस वैश्विक संस्था को अपनी कमियों और सीमाओं को स्वीकार करते हुए उनमें सुधार की दिशा में प्रयास करना चाहिए। जयशंकर ने ये टिप्पणियां भारत में संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय समन्वयक स्टीफन प्रीसनर की मौजूदगी में कीं। भारत मंडपम में आयोजित इस कार्यक्रम में चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ मनाई गई। जयशंकर ने कहा कि दुनिया की सामूहिकता और सहयोग की भावना आठ दशक से भी पहले संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय व्यक्त की गई थी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद एक में इस संस्था को साझा उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए ‘‘राष्ट्रों के कार्यों में सामंजस्य स्थापित करने’’ का केंद्र बनाने की बात कही गई है।

विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘इसलिए यह उचित है कि हम संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाते हुए एकजुटता की भावना को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताते हैं। आखिरकार, दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों और अवसरों, दोनों से सामूहिक प्रयासों के जरिए सबसे बेहतर एवं प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।’’ जयशंकर ने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि हम एक अपूर्ण दुनिया में रहते हैं। लेकिन हम सभी लगातार अधिक पूर्णता की दिशा में प्रयास करते रहते हैं।’’ मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के संदर्भ में इसका अर्थ है कि उसे अपनी कमियों और सीमाओं को पहचानना चाहिए तथा सुधार की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

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