क्रेडिट ग्रोथ के साथ वित्तीय समावेशन पर भी विशेष ध्यान दें बैंक- मुख्य सचिव

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  • मुख्य सचिव एवं एसएलबीसी अध्यक्ष की सह-अध्यक्षता में 170वीं एसएलबीसी बैठक आयोजित
  • ‘विकसित राजस्थान-2047’ के लक्ष्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं बैंक

जयपुर, गुरुवार, 03 सितंबर 2026। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास एवं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी), राजस्थान के अध्यक्ष एवं बैंक ऑफ बड़ौदा के कार्यपालक निदेशक श्री संजय वी. मुदालियर की सह-अध्यक्षता में गुरुवार को एसएलबीसी की 170वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में क्रेडिट ग्रोथ, वित्तीय समावेशन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि बैंक क्रेडिट ग्रोथ के साथ-साथ वित्तीय समावेशन पर भी विशेष ध्यान दें, ताकि समाज के हर वर्ग तक संस्थागत वित्तीय सेवाओं का लाभ पहुंच सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश के समावेशी आर्थिक विकास में बैंकिंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और बैंक सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

श्री श्रीनिवास ने कहा कि बैंक केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न क्रेडिट वितरण एवं रोजगारोन्मुखी योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों में अधिकाधिक ऋण वितरण किया जाना सुनिश्चित करें, जिससे कि ‘विकसित राजस्थान-2047’ के लक्ष्यों की दिशा में अपेक्षित प्रगति एवं वृद्धि दर सुनिश्चित की जा सके। तथा जिला स्तर पर आयोजित होने वाली DLRC एवं DLCC बैठकों में प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के अंतर्गत ऋण वितरण की समीक्षा की जावें, जिससे कि सभी जिलों में प्रभावी क्रेडिट वितरण हो सके।

मुख्य सचिव ने साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों की रोकथाम के लिए बैंकों से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि साइबर वित्तीय अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बैंकों, पुलिस एवं संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

मुख्य सचिव ने ‘विकसित राजस्थान-2047’ के विजन के चार प्रमुख स्तंभों—युवा शक्ति, नारी शक्ति, अन्नदाता तथा सुशासन/नीति-वित्त एवं प्रशासन—पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों को सशक्त बनाने तथा समाज के प्रत्येक वर्ग तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

एसएलबीसी अध्यक्ष श्री संजय वी. मुदालियर ने प्रदेश में वित्तीय समावेशन को और मजबूत बनाने तथा सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में बैंकों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने बैंकिंग सेवाओं को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए 1930 साइबर क्राइम कॉल सेंटर के भ्रमण तथा ‘स्मार्ट बैंकिंग एवं सेफ बैंकिंग 2.0’ अभियान का उल्लेख किया। साथ ही बताया कि राज्य सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के सहयोग से यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI) को ई-धरती पोर्टल से जोड़ा है, जिससे भूमि अभिलेखों में ऋण संबंधी प्रविष्टियों की प्रक्रिया ऑनलाइन एवं सरल हुई है।

बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक साख योजना एवं विभिन्न रोजगारोन्मुखी, वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में बैंकों की प्रगति की समीक्षा की गई। बैंकों के बेहतर प्रदर्शन की सराहना करते हुए आगामी तिमाहियों में भी इसे जारी रखने पर जोर दिया गया, ताकि प्रदेश में रोजगारोन्मुखी योजनाओं, वित्तीय समावेशन एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और सुदृढ़ किया जा सके।

बैठक में सदस्य बैंकों के लिए निर्धारित लक्ष्यों और विभिन्न व्यावसायिक मानदंडों पर उनकी प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही राज्य सरकार से संबंधित लंबित बैंकिंग विषयों एवं विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर चर्चा कर उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बैंकों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। भारतीय रिजर्व बैंक एवं राजस्थान पुलिस की साइबर अपराध शाखा की ओर से भी संबंधित विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया।

बैठक में केंद्र सरकार के वित्तीय सेवा विभाग के अतिरिक्त सचिव डॉ. देबाशीष पृष्टि, उद्योग विभाग के आयुक्त श्री नलिन सक्सेना, राजस्थान पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (साइबर अपराध) श्री विजय कुमार सिंह, आरआईटीआई के सीईओ श्री सत्येन्द्र कुमार, राजस्थान पुलिस के उप महानिरीक्षक (साइबर अपराध) श्री शांतनु शर्मा, पुलिस अधीक्षक (साइबर अपराध) श्री धनपत राज, भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक श्री रंजीम शंकर तथा नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. आर. रीम बाबू सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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