एलडीएफ सरकार ने विड़िण्गम परियोजना में देरी पर 219 करोड़ रुपये का जुर्माना माफ किया था: सतीशन
तिरुवनंतपुरम, बुधवार, 15 जुलाई 2026। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने बुधवार को आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार ने विड़िण्गम बंदरगाह परियोजना में देरी की वजह से अदाणी समूह की कंपनी पर लगाए गए 219 करोड़ रुपये के जुर्माने को माफ कर दिया था। मुख्यमंत्री ने इसी के साथ वर्तमान मुख्य विपक्षी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि विड़िण्गम बंदरगाह परियोजना में एमएससी को 49 प्रतिशत हिस्सेदारी स्थानांतरित करने का प्रस्ताव एक 'बड़े सौदे' का हिस्सा है। सतीशन ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अदाणी विड़िण्गम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (एवीपीपीएल) द्वारा मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी (एमसीएफ) को प्रस्तावित हिस्सेदारी स्थानांतरण के बारे में कोई फैसला नहीं लिया है और इस मामले की जांच मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक अधिकार-प्राप्त समिति कर रही है।
सतीशन ने कहा कि राज्य सरकार तभी कोई फैसला लेगी जब यह सुनिश्चित हो जाएगा कि केरल के हितों की पूरी तरह से रक्षा हो रही है। उन्होंने कहा, ''हमने एक अधिकार-प्राप्त समिति का गठन किया है। इसके लिए एक प्रक्रिया है। सरकार ऐसा कोई निर्णय नहीं लेगी जिससे राज्य के हितों को नुकसान पहुंचे। केवल राज्य के हितों की रक्षा करने वाला निर्णय ही लिया जाएगा।'' विपक्ष के ' बड़े सौदे' के आरोप को खारिज करते हुए सतीशन ने कहा, ''वे लगातार इसे बड़ा सौदा आदि कह रहे हैं। हमने कुछ नहीं किया है। हमने कोई फैसला नहीं लिया है।'' पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना को पूरा करने के लिए पूर्व में तय समयसीमा चूक जाने के बाद उस सरकार ने रियायती समझौते में बदलाव किया था।
कांग्रेस नेता ने कहा, ''क्या आपको पता है कि पिछली बार उन्होंने क्या किया था? रियायती समझौते के तहत, यह परियोजना 2019 में पूरी होनी थी लेकिन यह समय पर पूरी नहीं हुई। अगर बंदरगाह का काम पूरा नहीं हुआ, तो इसे 2024 में खत्म हो जाना चाहिए था। इसके बजाय, उसने रियायत समझौते में बदलाव किये और पांच साल का विस्तार दे दिया। उस विस्तार की वजह से निजी कंपनी को मिलने वाली रियायत की अवधि 40 साल से बढ़कर 45 साल हो गई।'' सतीशन ने दावा किया कि पिछली सरकार ने परियोजना में देरी के लिए लगने वाले जुर्माने को भी माफ कर दिया था।
उन्होंने आरोप लगाया, ''रियायती समझौते में क्या कहा गया है? अगर वे परियोजना में देरी करते हैं, तो उन्हें हर दिन 12 लाख रुपये देने होंगे। पांच साल की देरी के कारण, जुर्माने के प्रावधान के तहत सरकार को दी जाने वाली रकम 219 करोड़ रुपये हो गई। उन्होंने इसका एक-एक रुपया माफ कर दिया। उन्होंने इसे दो चरणों में माफ किया।'' संवाददाताओं ने जब मुख्यमंत्री का ध्यान दिलाया कि पूर्ववर्ती सरकार ने जुर्माना माफी के लिए बाढ़ और कोविड-19 का हवाला दिया था, तो उन्होंने कहा कि बाढ़ और कोविड-19 महामारी की वजह से काम में रुकावट सिर्फ कुछ महीनों के लिए आई थी, जबकि कंपनी को पांच साल की देरी के लिए राहत दी गई थी।
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