वियतनाम नौका हादसे के जीवित बचे पर्यटक ने सुनाई आपबीती, कहा- 'तीन मिनट में पलट गई थी स्पीडबोट'

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चेन्नई, मंगलवार, 14 जुलाई 2026। वियतनाम में हाल में हुए नौका हादसे में जीवित बचे लोगों में शामिल निर्मल कुमार ने उस भयावह घटना का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे एक द्वीप से दूसरे द्वीप की उनकी सामान्य यात्रा कुछ ही पलों में खौफनाक मंजर में बदल गई। फू क्वोक द्वीप के निकट 11 जुलाई को होन माय रुट न्गोआई के पास 32 भारतीय पर्यटकों और चालक दल के चार स्थानीय सदस्यों को लेकर जा रही एक नौका पलट गई थी। इस हादसे में 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई। अन्य 16 लोगों को बचा लिया गया और चिकित्सीय उपचार के बाद वे भारत लौट आए हैं, जबकि एक अन्य व्यक्ति की हालत गंभार है और उसका फू क्वोक के एक अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।

मृतकों में से 10 तमिलनाडु, तीन आंध्र प्रदेश और दो केरल के निवासी थे। इनमें दो महिलाएं भी शामिल थीं। बचाव अभियान में सहायता के लिए वियतनाम में रुके कुमार ने बताया कि यात्रा शुरू होने पर नौका मुश्किल से अभी 300 मीटर आगे ही बढ़ी थी कि अचानक एक तेज लहर से स्पीडबोट पलट गई, जिससे 15 यात्री उसके भीतर फंस गए। डिंडीगुल जिले के पलानी निवासी कुमार ने 'पीटीआई वीडियो' को बताया कि उनका समूह आठ जुलाई को शुरू हुई यात्रा के अंतिम चरण में 11 जुलाई को एक द्वीप से दूसरे द्वीप जाने के लिए स्पीडबोट में सवार हुआ था। उन्होंने कहा, ''नौका में सवार होने के तीन मिनट के भीतर और मुश्किल से 300 मीटर आगे बढ़ने पर ही स्पीडबोट पलट गई।''

कुमार ने बताया, ''एक बहुत बड़ी और बेहद तेज लहर स्पीडबोट से टकराई, जिससे वह एक ओर झुक गई। इसके बाद बाईं ओर बैठे यात्री दाईं ओर गिर पड़े। अचानक पूरा भार एक तरफ आ जाने से स्पीडबोट पलट गई।''  उन्होंने कहा कि चालक और गाइड सबसे पहले पानी में कूदे। उन्हें देखकर वह और करीब 20 अन्य यात्री भी तुरंत पानी में कूद गए और बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन पीछे बैठे यात्रियों को बच निकलने का मौका नहीं मिला। कुमार ने कहा, ''स्पीडबोट के भीतर करीब 15 लोग फंस गए। उन्होंने लाइफ जैकेट पहन रखी थी, लेकिन नाव पलट जाने के कारण वे उसके नीचे दब गए और बाहर नहीं निकल सके।'' उन्होंने बताया कि बचाव दल करीब 10 मिनट में मौके पर पहुंच गया और पानी में तैर रहे लोगों को बाहर निकाल लिया, लेकिन नाव के नीचे फंसे लोगों को निकालने में 20 से 30 मिनट लग गए। कुमार ने बताया कि इस हादसे में उनके बचपन के मित्र मुरुगा प्रभु की भी मौत हो गई। उन्होंने कहा, ''मैं उनके शव की बरामदगी और सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही वियतनाम से रवाना हुआ।''

उन्होंने कहा कि पर्यटक दल के साथ मौजूद एक चिकित्सक का मानना था कि यदि मौके पर आवश्यक चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध होतीं तो चार-पांच और लोगों की जान बचाई जा सकती थी। कुमार ने कहा, ''हमने यह बात वियतनाम सरकार के समक्ष रखी है।'' उन्होंने बताया कि स्पीडबोट पर सवार 36 लोगों (32 यात्री और चालक दल के चार सदस्य) में बड़ी संख्या तमिलनाडु के लोगों की थी। मृतकों में राज्य के 10 लोग शामिल हैं, जिनमें चार चेन्नई, तीन तिरुचिरापल्ली तथा एक-एक सलेम, इरोड और तिरुप्पुर के निवासी थे।

उन्होंने बताया कि मृतकों के पार्थिव शरीर को सोमवार रात साढ़े नौ बजे मुंबई पहुंचाया गया और उन्हें मंगलवार सुबह चेन्नई तथा कोयंबटूर भेजे जाने की व्यवस्था की गई है। सरकार ने शवों को उनके परिजनों को सौंपने के लिए आवश्यक इंतजाम किए हैं। कुमार ने भारतीय दूतावास और वियतनाम सरकार की 24 घंटे की समन्वय व्यवस्था के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की अपील करते हुए कहा, ''यह विदेशी धरती पर हुई अप्रत्याशित त्रासदी है। परिवार गहरे सदमे में हैं। यदि सरकार राहत कोष की घोषणा करे तो उन्हें काफी मदद मिलेगी।''
 

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