उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने नशा-मुक्त भारत बनाने के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान किया

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बेंगलुरु, रविवार, 28 जून 2026। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शिक्षण संस्थानों, परिवारों, स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों तथा कानून लागू कराने वाली एजेंसियों से नशा-मुक्त भारत बनाने के लिए एक साथ मिलकर काम करने का रविवार को आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान सभी शैक्षणिक परिसरों, शहरों और पूरे देश में चलाया जाना चाहिए। बेंगलुरु में राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के 31वें स्थापना दिवस समारोह और 'नशा मुक्त भारत सम्मेलन' को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि मादक पदार्थों का सेवन न केवल व्यक्ति की सेहत के लिए, बल्कि शिक्षा, उत्पादकता, परिवार के कल्याण और राष्ट्रीय विकास के लिए भी खतरा है।

उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व करने में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "नशा मुक्त भारत का दृष्टिकोण सिर्फ मादक पदार्थों का न होना नहीं है। इसका मतलब है स्वस्थ विकल्प, सोच-समझकर लिए गए फैसले, सहयोगी परिवार और मजबूत समुदाय।" उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय ने स्वास्थ्य शिक्षा को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवा पेशेवर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने भरोसा जताया कि इसके छात्र उपचार, जन-जागरूकता, नीति-समर्थन और साक्ष्य-आधारित समाधानों के जरिए मादक पदार्थों के खतरे से निपटने की कोशिशों में अगुवाई करेंगे।

उन्होंने कहा कि माता-पिता अक्सर सामाजिक बदनामी के डर से अपने परिवार में मादक पदार्थ की लत को मानने से हिचकिचाते हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या को खत्म करने के लिए इच्छाशक्ति सबसे जरूरी है और छात्रों से अपील की कि वे यह सुनिश्चित करें कि मादक पदार्थ रोधी शपथ जो उन्होंने ली है, वह उनके साथियों और समुदायों तक भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि जागरूकता की शुरुआत व्यक्तियों से होनी चाहिए, फिर यह कक्षा, शैक्षणिक परिसरों, शहरों और जिलों तक फैलनी चाहिए और आखिरकार इससे नशा-मुक्त कर्नाटक और नशा-मुक्त भारत का निर्माण होना चाहिए। प्रौद्योगिकी, परामर्श, साथियों के सहयोग और जन स्वास्थ्य योजनाओं को शामिल करने वाले नए तरीकों की वकालत करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि शोध के आधार पर ही नीति बननी चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मादक पदार्थों के खतरे से निपटने के लिए विद्यालयों, कॉलेजों, परिवारों, सामुदायिक संगठनों, स्वास्थ्य सेवा संस्थानों, कानून लागू करने वाली एजेंसियों और नागरिक संस्थाओं को मिलकर काम करना चाहिए। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार नशा-मुक्त कर्नाटक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि मादक पदार्थ के कारोबार में शामिल लोगों के साथ-साथ पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों में मादक पदार्थ मिलाने वाले लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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