'अमृत काल' छात्रों के लिए 'मृत काल' बना, धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफा दें: खरगे

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नई दिल्ली, शनिवार, 16 मई 2026। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) में कथित अनियमितता से जुड़े मामले का हवाला देते हुए शनिवार को कहा कि मोदी सरकार में 'अमृत काल' छात्रों के लिए 'मृत काल' साबित हो रहा है और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री को चुप्पी तोड़नी चाहिए और 'परीक्षा-लीक पर चर्चा' करनी चाहिए। खरगे ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''मोदी सरकार में 'अमृत काल' प्रवेश परीक्षा में शामिल छात्रों के लिए 'मृत काल' साबित हो रहा है। खबरों के मुताबिक कई छात्र-छात्राओं ने नीट का प्रश्नपत्र लीक होने के कारण पहुंचे सदमे से आत्महत्या की है।''

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी के रितिक मिश्रा, दिल्ली की 20 वर्षीय अंशिका पांडेय, राजस्थान में झुंझुनूं के प्रदीप मेघवाल, गोवा में रह रहे बेंगलुरु के एक छात्र ने यह कदम उठाया है। खरगे ने कहा, ''किसी ने बचपन से सपना देखा, किसी ने परिवार की उम्मीदों के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया, वर्षों तैयारी की। लेकिन मोदी सरकार की भ्रष्ट और निकम्मी व्यवस्था ने उनके सपनों को रौंद दिया।'' खरगे ने दावा किया कि 'मोदी राज' में 90 से ज्यादा प्रश्नपत्र लीक हो चुके हैं तथा नौ करोड़ से ज्यादा छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा, ''बेरोजगारी की आग पहले ही युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही है। भाजपा संरक्षित प्रश्नपत्र लीक माफिया सरकार के निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से परीक्षा कराने के दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।''

कांग्रेस अध्यक्ष ने कटाक्ष करते हुए कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी जी अब तो खुद 'फैक्ट चेक' करने लगे हैं…। कल उन्होंने 'इज ऑफ लिविंग' पर पोस्ट किया, पर नीट प्रश्नपत्र लीक और छात्रों की आत्महत्या पर चुप्पी साधे रहे।'' खरगे ने आरोप लगाया कि 'नीट-2024' का प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में जिन अधिकारियों पर सवाल उठे, उन्हें सजा नहीं मिली, बल्कि उनको मलाईदार पद दे दिए गए। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि हर साल युवाओं का भविष्य लूटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री तुरंत इस्तीफा दें। खरगे ने कहा, ''मोदी जी परीक्षा-लीक पर चर्चा कीजिये,चुप रहने से कुछ नहीं होगा।''

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शिक्षा संबंधी संसद की स्थायी समिति का उल्लेख करते हुए यह दावा भी किया कि समिति की सिफारिशों को मानने से इनकार करके मंत्री ने संसद की बहुदलीय परंपराओं को खारिज किया है। रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''मोदी सरकार का शिक्षा तंत्र, जो तीसरे दर्जे की औसत अकादमिक सोच रखने वाले लोगों से भरा हुआ है, पिछले कुछ वर्षों में खुद को बेहद अक्षम, राजनीतिक रूप से पक्षपाती और भ्रष्ट साबित कर चुका है। हर गुजरते महीने के साथ एक नया संकट सामने आ जाता है।'' उन्होंने ने आरोप लगाया कि अब यह भी स्पष्ट हो गया है कि मंत्रालय की अक्षमता की बराबरी अगर कोई कर सकता है, तो वह मंत्री का अहंकार है। कांग्रेस नेता ने कहा, ''जब मीडिया ने उनसे पूछा कि उनके मंत्रालय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) पर संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों पर ध्यान क्यों नहीं दिया, तो मंत्री ने यह कहकर समिति की रिपोर्ट को गंभीरता से लेने से इनकार कर दिया कि उसमें 'विपक्ष के सदस्य' शामिल हैं।''

रमेश ने कहा, ''सच्चाई यह है कि समिति के 30 सांसदों में से 17 स्वयं भाजपा के हैं। समिति की सिफारिशों में के. राधाकृष्णन विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट की फिर से पुष्टि भी शामिल है, जिसका हवाला मंत्री स्वयं देते हैं। संसद की स्थायी समिति को स्वीकार करने से मंत्री का इनकार दरअसल उनकी अपनी पार्टी के सांसदों और भारतीय संसद की बहुदलीय परंपराओं को खारिज करने जैसा है।''  उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री अपने वार्षिक परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का बड़े गर्व के साथ व्यापक प्रचार करते हैं। लेकिन आज समय की मांग परीक्षा की समीक्षा है। शिक्षा मंत्री इस जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त नहीं दिखाई देते।''

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