कर्नाटक:उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र पर साधा निशाना
बेंगलुरु, रविवार, 19 अप्रैल 2026। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लाने के समय और तरीके को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए रविवार को कहा कि विपक्ष को विश्वास में नहीं लिया गया। उन्होंने लोकतांत्रिक ढांचे के तहत इस पर व्यापक रूप से विचार-विमर्श किये जाने की मांग की। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस लगातार महिला आरक्षण का समर्थन करती रही है, लेकिन जिस तरीके से यह विधेयक लाया गया, उस पर आपत्ति है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के साथ पर्याप्त चर्चा किए बिना इसे संसद में पेश किया गया।
शिवकुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा, " यह लोकतंत्र है; यह हिटलर-शैली का शासन नहीं है। वे इसे चुनावों के बीच में लाकर पूरे निर्वाचन क्षेत्रों को बदलने की कोशिश नहीं कर सकते।" उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस कदम पर सभी दलों के बीच चर्चा होनी चाहिए थी। कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष शिवकुमार ने कहा, ''उन्हें सभी को विश्वास में लेना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। यही कारण है कि विपक्षी दलों ने बहुत अच्छा काम किया। इसलिए यह 'इंडिया' गठबंधन की जीत है।''
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के संसदीय चुनावों से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया। सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।
विधेयक पर मत विभाजन में 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस विधेयक को पारित करने के लिए 352 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए लोकसभा की सीट संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था। महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव था।
भाजपा के इस आरोप पर कि कांग्रेस महिला विरोधी है, शिवकुमार ने कहा, "यह किसी की निजी संपत्ति नहीं है-महिलाएं देश की संपत्ति हैं। हमने इसे राज्यसभा में पारित किया था और कांग्रेस ने स्थानीय निकायों में पहले ही महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया है। आज भी हम इसका समर्थन करते हैं।" उन्होंने कहा, "हमसे बिना सलाह किए वे निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उत्तर भारत को अधिक महत्व मिलेगा और दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व कम होगा। इसे कोई भी बर्दाश्त नहीं करेगा।" शिवकुमार ने कहा कि राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और दक्षिण भारत के मुख्यमंत्रियों- एम के स्टालिन, ए रेवंत रेड्डी तथा सिद्धरमैया ने भी इस कदम का विरोध किया है और विधेयक की हार को "लोकतंत्र की बड़ी जीत" बताया है।
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