उपराष्ट्रपति ने सिंधी भाषा में संविधान का नवीनतम संस्करण जारी किया

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नई दिल्ली, शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026। उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को यहां सिंधी भाषा में संविधान का नवीनतम संस्करण जारी किया, जो देवनागरी और फारसी दोनों लिपियों में है। उपराष्ट्रपति ने सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए सिंधी भाषी समुदाय को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सिंधी को सबसे प्राचीन और सबसे मधुर भाषाओं में से एक बताया और कहा कि इसकी साहित्यिक परंपरा वेदांत दर्शन एवं सूफी विचारों के एक अद्वितीय संगम को दर्शाती है, जो एकता, प्रेम तथा भाईचारे के सार्वभौमिक मूल्यों को बढ़ावा देती है। इस अवसर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार सिंधी भाषा में, विशेष रूप से देवनागरी लिपि में संविधान का प्रकाशन, भाषाई समावेशिता को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि राष्ट्र की जीवंत आत्मा है, जो इसकी आकांक्षाओं को समाहित करता है, अधिकारों की रक्षा करता है और लोकतांत्रिक शासन का मार्गदर्शन करता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपने संविधान को विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध कराने के मामले में अद्वितीय है। उन्होंने हाल के वर्षों में किए गए ऐसे ही प्रयासों का उल्लेख किया, जिनमें बोडो, डोगरी, संथाली, तमिल, गुजराती और नेपाली भाषाओं में अनुवाद शामिल हैं। राधाकृष्णन ने कहा कि ये प्रयास भारत की भाषाई विविधता का सम्मान करते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं।

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