जनहित याचिका में राज्य सरकार पर नव केरल सर्वेक्षण के लिए सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का आरोप
कोच्चि, मंगलवार, 13 जनवरी 2026। कोच्चि स्थित उच्च न्यायालय ने विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार पर ‘नव केरल नागरिक प्रतिक्रिया कार्यक्रम’ नामक सर्वेक्षण कराने के लिए ‘‘सार्वजनिक धन के दुरुपयोग’’ का आरोप लगाने संबंधी जनहित याचिका मंगलवार को विचारार्थ स्वीकार कर ली। मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी एम की पीठ ने राज्य को केएसयू प्रदेश अध्यक्ष अलोशियस जेवियर द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए 21 जनवरी तक का समय दिया।
अधिवक्ता टिस्सी रोज के. चेरियन के माध्यम से दायर याचिका में सार्वजनिक खजाने के धन और सरकारी तंत्र के ‘‘स्पष्ट दुरुपयोग’’ का आरोप लगाया गया है और कहा गया है कि इसका इस्तेमाल ‘‘प्रशासनिक कवायद की आड़ में पक्षपातपूर्ण राजनीतिक अभियान’’ के लिए किया गया। याचिका में कहा गया है कि सर्वेक्षण एक जनवरी को शुरू हुआ था और 28 फरवरी तक पूरा होने वाला है। यह दावा किया गया है कि सर्वेक्षण टीम के लिए स्वयंसेवकों के रूप में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों की भर्ती की गई थी।
याचिका में यह दलील दी गई है कि इसके परिणामस्वरूप राज्य द्वारा वित्त पोषित एक पहल को ‘‘सत्तारूढ़ मोर्चे के लिए घर-घर जाकर राजनीतिक प्रचार और घोषणापत्र तैयार करने के अभियान’’ में बदल दिया गया था। उन्होंने उच्च न्यायालय से सरकार को ‘‘प्रस्तावित सर्वेक्षण की विस्तृत योजना और वित्तीय संसाधनों का खुलासा करने’’ तथा सत्तारूढ़ दल के व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ के लिए सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया है।
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