कर्नाटक सरकार ने प्रदर्शनों के दौरान पथराव के लिए दर्ज मामलों समेत 60 मामले वापस लिए
बेंगलुरु, शुक्रवार, 05 सितंबर 2025। कर्नाटक मंत्रिमंडल ने 2019 में चित्तपुर में पथराव की एक घटना में कथित तौर पर शामिल लोगों और ईडी द्वारा कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार की उसी साल गिरफ्तारी के बाद पथराव के लिए उनके समर्थकों के खिलाफ दर्ज मामले सहित 60 मामलों को वापस लेने का फैसला लिया है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच. के. पाटिल ने बताया कि मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को राज्य के विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज 60 मामलों को वापस लेने का फैसला किया है, जो किसानों, छात्रों और कन्नड़ कार्यकर्ताओं सहित अन्य से जुड़े हैं। बहरहाल, मंत्री ने मामलों की विस्तृत जानकारी नहीं दी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट ने जिन मामलों को वापस लेने का फैसला किया है, उनमें 2019 चित्तपुर पथराव मामला और डी के शिवकुमार के कथित समर्थकों के खिलाफ दर्ज मामले शामिल हैं, जो 2019 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनकी गिरफ्तारी के बाद कनकपुरा में बसों और सरकारी कार्यालयों पर कथित रूप से पथराव करने के लिए दर्ज किए गए थे। शिवकुमार उस समय विधायक थे। चित्तपुर की घटना कथित तौर पर तब हुई जब पुलिस ने हिंदू कार्यकर्ताओं से मिली सूचना के आधार पर गाड़ियों में ले जाए जा रहे मवेशी जब्त किए थे। सूत्रों ने बताया कि शिवकुमार के भाई और बेंगलुरु ग्रामीण के पूर्व सांसद डी के सुरेश के समर्थकों के खिलाफ मामले भी वापस ले लिए गए हैं।
जिन मामलों को वापस लिया गया है, उनमें विभिन्न समूहों और व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज मामले शामिल हैं। इनमें किसान समर्थक, दलित समर्थक, कन्नड़ समर्थक संगठन, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और विभिन्न स्थानों पर गणपति की शोभायात्रा से संबंधित झड़पों में दर्ज मामले शामिल हैं। एक अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक मामले में पुलिस महानिदेशक और महानिरीक्षक, अभियोजन एवं सरकारी वाद निदेशक और विधि विभाग की अलग-अलग राय ली गई। इसके बाद ऐसे मामलों पर विचार करने के लिए सरकार द्वारा गठित मंत्रिमंडल की उप-समिति के समक्ष मामले रखे गए। मंत्रिमंडल की उप-समिति द्वारा उपयुक्त समझे जाने वाले मामलों को मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाता है। सूत्रों के अनुसार, गृह विभाग, डीजीपी और आईजीपी, अभियोजन एवं सरकारी वाद निदेशक और विधि विभाग ने इन सभी मामलों को वापस न लेने की सलाह दी थी।
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