लोकपाल अधिकार क्षेत्र विवाद: उच्चतम न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार को न्यायमित्र नियुक्त किया

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नई दिल्ली, मंगलवार, 18 मार्च 2025। उच्चतम न्यायालय ने लोकपाल की ओर मौजूदा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ शिकायत की जांच करने के अधिकार क्षेत्र से संबंधित विवाद मामले में मंगलवार को वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार को न्यायमित्र नियुक्त किया। न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति अभय एस ओका की पीठ ने स्पष्ट किया कि वह लोकपाल के 27 जनवरी, 2025 के आदेश की वैधता से संबंधित मामले में अधिकार क्षेत्र के मुद्दे की जांच करेगी, न कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की योग्यता की। लोकपाल के उस आदेश में कहा गया था कि भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था मौजूदा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ शिकायत की जांच कर सकती है। शीर्ष अदालत के समक्ष शिकायतकर्ता व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और कहा कि उन्होंने लिखित दलीलें दाखिल की हैं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि लोकपाल ने अपना हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें आदेश में उनके द्वारा अपनाए गए रुख को दोहराया गया है।उन्होंने कहा कि लोकपाल के पास ऐसी शिकायतों की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है। हालांकि, अदालत ने शिकायतकर्ता की ओर से पीठ की सहायता के लिए श्री कुमार को न्यायमित्र नियुक्त करने का फैसला किया। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और बी एच मार्लापल्ले ने न्यायालय की सहायता करने की मांग की थी। शीर्ष अदालत ने 20 फरवरी को लोकपाल के आदेश पर रोक लगाते हुए मौखिक रूप से कहा था कि यह 'बहुत ही परेशान करने वाला' है। उच्चतम न्यायालय ने स्वत: संज्ञान मामला दर्ज करने के बाद कहा था कि संविधान लागू होने के बाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संवैधानिक अधिकारी हैं, न कि केवल वैधानिक पदाधिकारी, जैसा कि लोकपाल ने निष्कर्ष निकाला था।

इस मामले में अदालत ने तब केंद्र सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया था। पीठ ने तब यह भी कहा था कि वह इस संबंध में कानून बनाएगी, क्योंकि सभी न्यायाधीशों की नियुक्ति संविधान के तहत ही होती है। पीठ ने शिकायतकर्ता को शिकायत की विषय-वस्तु का खुलासा न करने और 'इसे पूरी तरह गोपनीय रखने' का भी आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने शिकायतकर्ता को उच्च न्यायालय के संबंधित न्यायाधीश का नाम उजागर करने से भी मना किया था। पीठ ने अपने रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया कि 'शिकायतकर्ता की पहचान छिपाएं और शिकायतकर्ता के निवास वाले उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) के माध्यम से उसे शिकायत भेजें।

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली लोकपाल पीठ ने माना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने के लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश उसके अधिकार क्षेत्र के अधीन होंगे। इस मामले में एक ही शिकायतकर्ता द्वारा उच्च न्यायालय के एक वर्तमान अतिरिक्त न्यायाधीश (नाम संशोधित) के विरुद्ध दो शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नामित न्यायाधीश ने राज्य में संबंधित अतिरिक्त जिला न्यायाधीश और उसी उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश को (जिन्हें एक निजी कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता के विरुद्ध दायर मुकदमे से निपटना था) उस कंपनी के पक्ष में प्रभावित किया था। यह आरोप लगाया गया था कि निजी कंपनी पहले नामित उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की मुवक्किल थी, जबकि वह बार में अधिवक्ता के रूप में वकालत कर रहे थे।

 

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