तमिलनाडु में दो और रामसर स्थलों की घोषणा
चेन्नई, रविवार, 04 फ़रवरी 2024। तमिलनाडु सरकार ने दो और रामसर स्थलों की घोषणा की है, जिसके साथ ही प्रदेश में रामसर स्थलों (आर्द्रभूमि) की कुल संख्या 16 हो गई है, जो देश में सबसे अधिक है। सरकार द्वारा घोषित दो नए रामसर स्थल अरियालुर जिले में कराईवेट्टी पक्षी अभयारण्य और और नीलगिरी जिले में लॉन्गवुड शोला रिजर्व फॉरेस्ट हैं। पर्यावरण , जलवायु परिवर्तन एवं वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के अनुसार, राज्य सरकार एक व्यापक संरक्षण और प्रबंधन योजना के माध्यम से अपनी आर्द्रभूमि की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। तमिलनाडु सरकार ने 115.15 करोड़ रुपये की लागत से 100 आर्द्रभूमियों की सुरक्षा, संरक्षण और उद्धार के लिए अपनी तरह का एक अनूठा मिशन ''तमिलनाडु वेटलैंड्स मिशन'' का भी शुभारंभ किया है।
उन्होंने बताया कि आर्द्रभूमियों पर रामसर संधि एक अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन है जो आर्द्रभूमियों और उनके संसाधनों के संरक्षण और बुद्धिमानीपूर्ण उपयोग के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की रूपरेखा प्रदान करता है। भारत ने एक फरवरी, 1982 को रामसर संधि पर हस्ताक्षर किया था। दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में तमिलनाडु सरकार ने 2022 में 13 नए रामसर स्थलों के लिए अधिसूचना प्राप्त की थी, जिससे प्वाइंट कैलिमेरे में पहले से मौजूद कोडियाक्कराई रामसर स्थलों के साथ प्रदेश भारत का अग्रणी राज्य बन गया। इसे वर्ष 2002 में अधिसूचित किया गया था। राज्य सरकार ने दो और स्थलों करैवेट्टी पक्षी अभयारण्य और लॉन्गवुड शोला रिजर्व फॉरेस्ट को रामसर स्थल घोषित करने के लिए प्रस्ताव भेजा था।
इन प्रस्तावों को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और रामसर स्थल सचिवालय द्वारा स्वीकार कर लिया गया है और इन स्थलों को रामसर स्थलों के रूप में नामित किया गया है। इसके साथ ही तमिलनाडु में रामसर स्थलों की कुल संख्या अब 16 हो गई है, जो देश में सबसे अधिक है। नव घोषित करैवेट्टी पक्षी अभयारण्य अरियालुर जिले में स्थित है और 453.7 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है।
उन्होंने बताया कि लॉन्गवुड शोला रिजर्व फॉरेस्ट नीलगिरी जिले में स्थित है और 116.007 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। यह स्थल तमिलनाडु के महत्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता क्षेत्रों में से एक है। यह स्थल वनस्पतियों और जीवों की 700 से अधिक प्रजातियों के लिए घर के रूप में कार्य करता है। लॉन्गवुड शोला अत्यंत नाजुक नीलगिरी पारिस्थितिकी तंत्र का एक अभिन्न अंग है। यह कोटागिरी के लिए एक प्रमुख जल स्रोत है और सिल्वन रिट्रीट नीचे के 18 गांवों को पानी की आपूर्ति करता है। पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग ने भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से अपने रामसर स्थलों के लिए एकीकृत प्रबंधन योजना तैयार करने का कार्य किया है।
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