त्रिपुरा में भाजपा को मदद पहुंचाने को खेल खेल रही है टीएमसी: अजय कुमार

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नई दिल्ली/अगरतला, रविवार, 12 फ़रवरी 2023। त्रिपुरा के कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अजय कुमार ने रविवार को कहा कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मदद पहुंचाने के लिए ‘‘एक खेल खेल रही है", लेकिन वह विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-वाम गठबंधन की संभावनाओं को बाधित नहीं कर पाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वाम-कांग्रेस गठबंधन पर कटाक्ष किए जाने के एक दिन बाद, कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य में गठबंधन मजबूत स्थिति में है क्योंकि त्रिपुरा में कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के बीच "राजनीतिक समानता" है। 

उन्होंने कहा, ‘‘आप (वाम-कांग्रेस गठबंधन के लिए) जमीन पर भीड़ देख सकते हैं। नेताओं के बीच छोटे मुद्दे हो सकते हैं, लेकिन कैडर के सभी लोग एकसाथ हैं। मैं पूरे त्रिपुरा में दौरे कर रहा हूं, यह देखकर काफी खुशी हो रही है।’’ टिपरा मोथा पार्टी द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में आधार हासिल करने और यह पूछे जाने पर कि क्या इससे वाम-कांग्रेस गठबंधन पर असर पड़ेगा, कुमार ने त्रिपुरा में माकपा के प्रमुख जितेंद्र चौधरी की ओर इशारा किया, जो एक आदिवासी नेता हैं। कुमार ने कहा, ‘‘वह (चौधरी) वास्तव में एक ऐसे नेता हैं जो उनकी (आदिवासियों की) भाषा बोलते हैं। वह धरतीपुत्र हैं। इसलिए मुझे लगता है कि आदिवासी भी समझ रहे हैं कि जितेंद्र चौधरी वास्तविक आदिवासी आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।’’ 

उन्होंने दावा किया कि राज्य के आदिवासी लोग चौधरी और कांग्रेस नेतृत्व की ओर बढ़ रहे हैं। त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभा में 20 सीट आदिवासी क्षेत्रों के लिए आरक्षित हैं। टीएमसी के त्रिपुरा में मैदान में उतरने और इस बारे में पूछने पर कि क्या इससे वाम-कांग्रेस की संभावनाओं को नुकसान पहुंचेगा, कुमार ने कहा, ‘‘मुझे ऐसा नहीं लगता (इससे वाम-कांग्रेस की संभावनाएं बाधित होंगी)। मेरा विश्लेषण यह है कि टीएमसी भाजपा की मदद करने के लिए एक खेल खेल रही है।’’ उन्होंने दावा किया कि ‘‘टीएमसी और भाजपा के बीच कुछ चल रहा है क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय के सभी मामले (टीएमसी नेताओं के खिलाफ) बंद कर दिए गए हैं।’’ 

अजय कुमार ने विश्वास जताया कि त्रिपुरा में अगली सरकार वाम-कांग्रेस की होगी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के खिलाफ काफी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्दा भाजपा के "झूठे वादों" और त्रिपुरा में "सबसे ज्यादा बेरोजगारी" होने का है। कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार द्वारा किसानों, शिक्षकों और बच्चों के लिए कुछ नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि त्रिपुरा में राजनीतिक हिंसा सबसे ज्यादा है और ‘‘जंगल राज’’ है। 

कांग्रेस नेता कुमार ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘लोग क्षुब्ध हैं, मुझ पर हमला किया गया। कोई सोच सकता है कि यदि मेरे जैसे किसी व्यक्ति पर हमला होता है, तो आम लोगों की कैसी स्थिति होगी। लड़कियों से बलात्कार होता है और शव पुलिस थाने से 50 मीटर की दूरी पर मिलता है, वे कार्यालयों को जलाते हैं, लोगों पर हमले करते हैं, कानून एवं व्यवस्था की स्थिति ध्वस्त हो गई है।’’ 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पुरानी पेंशन योजना की वापसी का वादा किया है, वह बच्चों की शिक्षा में सहयोग करेगी, गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले (बीपीएल) परिवारों की महिलाओं को सालाना 12,000 रुपये देगी और 150 यूनिट मुफ्त बिजली देगी। प्रधानमंत्री मोदी की इस टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर कि कांग्रेस और वाम दल केरल में ‘‘कुश्ती’’ लड़ते हैं और त्रिपुरा में ‘‘दोस्ती’’ करते हैं, कुमार ने कहा कि कांग्रेस और माकपा के बीच त्रिपुरा में राजनीतिक समानता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम एक बुरी ताकत से लड़ रहे हैं और हमें मिलकर लड़ने की जरूरत है। हमें लोकतंत्र को बचाने की जरूरत है और हमें लोगों को बचाने की जरूरत है।’’ माकपा त्रिपुरा की 43 सीट पर, कांग्रेस 13 सीट पर चुनाव लड़ेगी, जबकि गठबंधन के अन्य घटक- फॉरवर्ड ब्लॉक, आरएसपी और भाकपा- एक-एक सीट पर चुनाव लड़ेंगे। गठबंधन पश्चिम त्रिपुरा में रामनगर निर्वाचन क्षेत्र में एक निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन भी कर रहा है। राज्य विधानसभा के लिए मतदान 16 फरवरी को होगा और मतगणना दो मार्च को होगी। 2018 में, भाजपा त्रिपुरा में सत्ता में आई थी।

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