भारतीय वैज्ञानिक को प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया
नई दिल्ली, मंगलवार, 08 नवंबर 2022। ट्रॉपिकल मेडिसिन (दुर्लभ बीमारियों से संबंधित चिकित्सा) के क्षेत्र में काम करने वाले दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक संगठन ‘अमेरिकन सोसाइटी ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड हाइजीन’ (एएसटीएमएच) ने एक भारतीय चिकित्सक-वैज्ञानिक को 2022 के प्रतिष्ठित बैली के. एशफोर्ड पदक से सम्मानित किया है। भारतीय वैज्ञानिक को 2022 के ‘फेलो ऑफ अमेरिकन सोसाइटी ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एंड हाइजीन’ (एफएएसटीएमएच) पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के चेन्नई स्थित राष्ट्रीय क्षयरोग अनुसंधान संस्थान में आईसीईआर-भारत कार्यक्रम के वैज्ञानिक निदेशक डॉ सुभाष बाबू को 30 अक्टूबर को अमेरिका के सियेटल में आयोजित एएसटीएमएच की वार्षिक बैठक में पुरस्कृत किया गया।
आईसीईआर-भारत द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार ट्रॉपिकल मेडिसिन में उल्लेखनीय कार्य के लिए हर वर्ष एक या अधिक अनुसंधानकर्ताओं को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। आईसीईआर, आईसीएमआर के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) तथा अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शस डिसीजेस (एनआईएआईडी) के बीच दोनों देशों की अनुसंधान साझेदारी के तहत काम करता है। इस पुरस्कार के 82 साल के इतिहास में पहले कभी किसी भारतीय वैज्ञानिक को या भारतीय संस्थान में किये गये अनुसंधान कार्य के लिए यह पुरस्कार नहीं दिया गया।
डॉ बाबू को बैली के. एशफोर्ड पुरस्कार के अलावा 1995 से ट्रॉपिकल मेडिसिन में प्रतिबद्धता के साथ काम करने के लिए एफएएसटीएमएच भी प्रदान किया गया है। एएसटीएमएच के अध्यक्ष डॉ डेनियल बॉश ने विभिन्न रोगों के उपचार के लिए डॉ सुभाष बाबू के अनुसंधान की सराहना करते हुए कहा, ‘‘क्षयरोग (टीबी) रोधी उपचार पद्धति की प्रतिक्रिया में टीबी में टाइप-2 के मधुमेह के असर पर उनके मूल कार्य का टीबी के क्षेत्र में और वैश्विक स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक असर रहा है।’’
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