हवाई किराये में 700 प्रतिशत वृद्धि के आरोप वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से न्यायालय का इनकार

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नई दिल्ली, सोमवार, 02 नवम्बर 2026। उच्चतम न्यायालय ने हवाई किराये में करीब 700 प्रतिशत की वृद्धि का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर सोमवार को तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता से कहा कि वह हवाई यात्रा न करें। एक अधिवक्ता ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। अधिवक्ता ने कहा, ‘‘हवाई किराये में 700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।’’ इस पर पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘हवाई यात्रा न करें।’’ अधिवक्ता ने इसके जवाब में कहा कि हवाई यात्रा एक आवश्यक सेवा है और किराये में इस तरह की वृद्धि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता से संबंधित है। शीर्ष अदालत सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की ओर से दायर एक अलग याचिका पर पहले से ही सुनवाई कर रही है। इसमें नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत एवं स्वतंत्र नियामक की नियुक्ति तथा निजी विमानन कंपनियों द्वारा हवाई किराये और अन्य शुल्कों में होने वाले ‘अनिश्चित उतार-चढ़ाव’ को नियंत्रित करने के लिए नियामकीय दिशानिर्देश बनाने का अनुरोध किया गया है।

इस याचिका पर 16 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया था कि भारतीय विमानन क्षेत्र को विनियमित करने के उद्देश्य से 2024 के एक कानून के तहत बनाए गए नियमों को प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है और इन्हें दो सप्ताह के भीतर प्रकाशित किए जाने की संभावना है। शीर्ष अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से अगली सुनवाई की तारीख 16 नवंबर को भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत प्रकाशित नियमों को अदालत के समक्ष पेश करने को कहा था। इससे पहले 17 अगस्त को केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया था कि उसने देश के विमानन क्षेत्र के आधुनिकीकरण के उद्देश्य से भारतीय वायुयान अधिनियम के तहत नियम बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

पिछले साल नवंबर में शीर्ष अदालत ने लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था। इस मामले पर जनवरी में सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह हवाई किराये में होने वाले ‘अनिश्चित उतार-चढ़ाव’ के मामले में हस्तक्षेप करेगी। शीर्ष अदालत ने त्योहारों के दौरान हवाई किराये में अत्यधिक वृद्धि पर चिंता भी जताई थी और विमानन कंपनियों द्वारा किराये में की जाने वाली अत्यधिक वृद्धि को ‘शोषण’ करार देते हुए केंद्र और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा था।

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