सवाल पूछने वालों पर ही आरोप मढ़ना, भाजपा की घबराहट: अशोक गहलोत

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जयपुर, गुरुवार, 16 अक्टूबर 2026। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि जब निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जनता का भरोसा डगमगा रहा हो, तब जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वालों पर आरोप मढ़ना केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की घबराहट को दर्शाता है। गहलोत ने सोशल मीडिया मंच पर मोदी के एक भाषण का वीडियो साझा करते हुए यह आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, “छह जून 2011 का नरेन्द्र मोदी का भाषण देश के हर नागरिक को सुनना चाहिए, जिसमें वह कहते हैं कि अगर उनके हाथ बंधे नहीं होते, तो वह केंद्र सरकार के खिलाफ लड़ाई छेड़ देते।” गहलोत ने इसे अराजकता की पराकाष्ठा बताते हुए कहा कि 20 दिसंबर 2013 को भी मोदी ने कहा था कि जनता केंद्र सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए आक्रामक हो रही है।

उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाने वाले विपक्ष के सवालों से लेकर युवाओं की आवाज तक, भाजपा हर मुद्दे पर बौखलाई हुई है। गहलोत ने कहा, “गलती स्वीकार कर देश के सामने स्थिति स्पष्ट करने के बजाय भाजपा नेता विपक्ष और युवाओं पर हमले करने में लगे हैं। लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन की बात करना साजिश नहीं, बल्कि जनता का संवैधानिक अधिकार है।”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि 2014 से पहले लोकपाल के मुद्दे पर अन्ना हजारे के आंदोलन, काले धन को लेकर बाबा रामदेव के आंदोलन तथा 2जी व कोयला आवंटन घोटाले के आरोपों जैसे मुद्दों पर सड़कों पर प्रदर्शन हुए और दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। उन्होंने कहा, “आज न अन्ना हजारे के लोकपाल का पता है और न ही काले धन पर रामदेव बोल रहे हैं। 2जी और कोयला आवंटन घोटाले जैसे आरोपों को अदालत ने खारिज कर दिया।” गहलोत ने सवाल किया कि क्या 2014 से पहले इन मुद्दों को आधार बनाकर नरेन्द्र मोदी और भाजपा के अन्य नेता बदलाव की मांग नहीं कर रहे थे? उन्होंने कहा कि उस समय यह लोकतंत्र था, लेकिन आज वैसी ही मांगों को अराजकता बताया जा रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “देश का युवा अपने रोजगार, भविष्य और अधिकारों पर सवाल पूछ रहा है। उसकी आवाज को अराजकता कहना उसकी चिंताओं का अपमान है। जिस विचारधारा से भाजपा आती है, उसे शायद यह समझ ही नहीं आता कि असहमति का सम्मान लोकतंत्र का मूल आधार है।” उन्होंने कहा कि विपक्ष जो सवाल उठा रहा है, वही सवाल देश के करोड़ों नागरिकों के मन में भी हैं। गहलोत ने आरोप लगाया कि जब निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जनता का भरोसा डगमगा रहा हो, तब जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वालों पर आरोप मढ़ना भाजपा की घबराहट को दर्शाता है।

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