दि्ल्ली एसआईआर: अल्पसंख्यक बहुल व आरक्षित सीटों पर 20-45 फीसदी नाम प्रारूप सूची से हटाए गए
नई दिल्ली, मंगलवार, 01 सितंबर 2026। दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कवायद के तहत मसौदा सूची से अल्पसंख्यक-बहुल और अनुसूचित जाति (एससी)-आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों में 20 से 45 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई है, उनमें दिल्ली में सबसे ज्यादा नाम हटाए गए हैं। प्रारूप सूची में दिल्ली में करीब 33 प्रतिशत नाम हटाए गए हैं। दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची का मसौदा सोमवार को दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय द्वारा प्रकाशित किया गया। 70 विधानसभा क्षेत्रों में, 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47.5 लाख को प्रारूप सूची से बाहर कर दिया गया। ओखला में 3,62,813 मतदाता थे, जिनमें से 1,63,829 (45 प्रतिशत) के नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं, जिससे 1,98,984 मतदाताओं के नाम ही मसौदा सूची में रह गए हैं।
ओखला के अलावा दिल्ली में अन्य अल्पसंख्यक बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम नाम काटे गए हैं। इनमें चांदनी चौक में 38 प्रतिशत, बल्लीमारान में 32 फीसदी, मुस्तफाबाद में 28 प्रतिशत, बाबरपुर में 26 प्रतिशत, मटिया महल में 24 प्रतिशत और सीलमपुर में 23 प्रतिशत नाम हटाए गए हैं। इन निर्वाचन क्षेत्रों में सूची से बाहर किए गए मतदाताओं की संख्या चांदनी चौक में 48,405, मुस्तफाबाद में 80,804, बाबरपुर में 55,264, बल्लीमारान में 49,640, सीलमपुर में 45,105 और मटिया महल में 32,099 है।
दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम हटाने का कोई खास पैटर्न नहीं दिखा, लेकिन जिन सीटों पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग ज्यादा हैं, वहां सामान्य सीटों की तुलना में लोगों ने गणना फॉर्म ज्यादा संख्या में जमा किए। घर-घर जाकर सत्यापन की प्रक्रिया 30 जून से 17 अगस्त तक चली। मतदाताओं द्वारा जमा किए गए प्रपत्रों को डिजिटल रूप से दर्ज करने का काम सबसे ज्यादा सीलमपुर में हुआ जहां 76.6 प्रतिशत फॉर्म को डिजिटल रूप से दर्ज किया गया। इसके बाद मटिया महल में 75.5 प्रतिशत, बाबरपुर में 72.9 प्रतिशत और मुस्तफाबाद में 71.9 प्रतिशत फॉर्म का डिजिटलीकरण किया गया।
दिल्ली में एससी-आरक्षित 12 सीटों में, करोल बाग में 40 प्रतिशत मतदाताओं को प्रारूप से सूची से बाहर किया गया है। इसके बाद अंबेडकर नगर में 39 प्रतिशत, देवली और कोंडली में 37-37 प्रतिशत, त्रिलोकपुरी में 33 फीसदी और सीमापुरी और सुल्तानपुर माजरा में 31-31 प्रतिशत मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया है। जिन आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में 30 प्रतिशत से कम मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उनमें गोकलपुरी (25 प्रतिशत), बवाना (23 प्रतिशत), मादीपुर (23 प्रतिशत) और मंगोलपुरी (21 प्रतिशत) शामिल हैं।
संख्या के लिहाज से देखें तो देवली में 94,726, पटेल नगर में 80,346, कोंडली में 75,930, बवाना में 74,829, करोल बाग में 72,430, सीमापुरी में 68,227, त्रिलोकपुरी में 63,582, अंबेडकर नगर में 63,260 और गोकलपुरी में 60,625 मतदाताओं को सूचियों से बाहर किया गया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के अनुसार, प्रारूप मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत्यु, सूची में एक बार से ज्यादा नाम और अन्य (एएसडीडीओ) श्रेणियों के तहत ‘अनुपलब्ध’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
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