करीना कपूर ने 'दायरा' को बताया ड्रीम प्रोजेक्ट

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अभिनेत्री करीना कपूर खान इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म 'दायरा' की रिलीज की तैयारी में हैं। गुरुवार को उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इस प्रोजेक्ट पर काम करने के अपने अनुभव के बारे में बताया। अभिनेत्री करीना कपूर खान ने इंस्टाग्राम पर एक नोट शेयर कर बताया कि इस फिल्म ने उन्हें मुंबई के उन हिस्सों और ऐसी जगहों पर पहुंचाया, जहां वह पहले कभी नहीं गई थीं। करीना ने कहा कि भले ही वह पूरी जिंदगी इसी शहर में रही हैं और पूरे भारत में घूमी हैं, लेकिन 'दायरा' ने उन्हें मुंबई का एक अनदेखा पहलू दिखाया। अभिनेत्री ने लिखा, "मुंबई में मेरा जन्म हुआ। सारी जिंदगी इस शहर में रहते हुए देशभर में काफी सफर करने के बाद, मुझे लगता था कि मैं इस शहर और देश को अच्छे से जानती हूं, लेकिन फिल्म दायरा की शूटिंग के दौरान मैं ऐसी-ऐसी जगहों पर गईं, जो मैंने पहले कभी ना देखी थी और ना जानती थी।"

अभिनेत्री ने बताया कि फिल्म दायरा ने उनकी सामाजिक समझ को भी कई नई हदों तक पहुंचाया। उन्होंने लिखा, "दायरा का सफर मेरी रचनात्मकता को उन जगहों तक ले गया, जो मेरे लिए अब तक अनजान थे। दायरा ने मेरी सामाजिक समझ को भी कई नई हदों तक पहुंचाया। मैंने सीखा है कि हमारी जिंदगी और समाज सिर्फ दोहरा नहीं है, सब कुछ सिर्फ काला या सफेद नहीं होता। इनके बीच एक पूरा स्पेक्ट्रम है, ग्रे का एक पूरा संसार है, जिसमें हम जीते हैं। दायरा उस ग्रे को सिर्फ समझने की कोशिश नहीं करती बल्कि, ये उसके अंदर उतरती है, उसे कुरेदती है। यही दायरा का सार है। क्योंकि दायरा की दुनिया पूरी तरह ग्रे है, लेकिन इसके साथ-साथ, हमेशा दोहरी भी है।"

उन्होंने आगे लिखा, "यह फिल्म हमेशा से ही दोहरी कहानी वाली रही है। अपने मूल में 'दायरा' सिर्फ दोहराव के बारे में है और यह दोहरापन फिल्म के दो मुख्य किरदारों के जरिए दिखाया गया है। कास्टिंग के लिहाज से, यह मेरे लिए सपने के सच होने जैसा था। हिंदी और मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के दो बेहतरीन कलाकारों को एक-दूसरे के सामने लाना। क्योंकि 'दायरा' एक ऐसी कहानी है जो एक नहीं, बल्कि देश भर में हुई कई सच्ची घटनाओं से प्रेरित है। दायरा की कहानी भारत के किसी एक शहर या राज्य में नहीं घटती, बल्कि यह हमारे देश में लगभग हर जगह घटती है। दायरा की इस दुनिया को बेहतरीन कलाकारों और शानदार टीम ने जीवंत किया है।"

उन्होंने बताया कि इस कहानी में दोनों कलाकार कानून के सफर में हैं, लेकिन फिर, दोंनो खुद को कानून की नाजुक लकीरों के आर-पार पाते हैं। फिल्म में मैंने अजूनी का किरदार निभाया है, जो अपने उसूलों को लेकर अटूट है और पृथ्वीराज के रमन के तेवर भी उनके उसूल जितने मजबूत हैं। जिंदगी की तरह, दायरा में भी, दोनों के फैसले न काले हैं, न सफेद। दोनों ग्रे के एक ऐसे इंद्रधनुष में घुले हैं, जहां कुछ भी साफ-साफ, सही या गलत नहीं है। कभी कानून उन्हें रास्ता दिखाता है, तो कभी वही कानून उनके रास्ते रोक देता है। कानून की लकीरों के दरम्यान का सफर, है दायरा।"

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