बागी सांसदों की लोकसभा अध्यक्ष से 'असली तृणमूल' का दर्जा मांगने की योजना पर विशेषज्ञ ने सवाल उठाया
नई दिल्ली, रविवार, 14 जून 2026। संवैधानिक प्रक्रियाओं के एक विशेषज्ञ ने तृणमूल कांग्रेस के अलग हुए धड़े को लोकसभा अध्यक्ष से ''असली तृणमूल'' का दर्जा दिलाने की पार्टी के बागी सांसदों की कोशिश पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस पर फैसला करने का अधिकार निर्वाचन आयोग के पास है। असंतुष्ट सांसदों के एक समूह ने शुक्रवार को लोकसभा के 19 सदस्यों के समर्थन का दावा किया था और घोषणा की थी कि वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से सोमवार को मिलकर अपने गुट को ''असली तृणमूल'' संसदीय दल के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग करेंगे।
लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान के विशेषज्ञ पी. डी. टी. आचारी ने रविवार को 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े मौजूदा मामले में लोकसभा अध्यक्ष की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा, ''असली तृणमूल पर फैसला करने का अधिकार निर्वाचन आयोग के पास है। सुभाष देसाई मामले में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने स्पष्ट किया था कि जब दलबदल विरोधी कानून से जुड़ा मामला हो और दो या उससे अधिक धड़े खुद को वास्तविक या असली पार्टी बता रहे हों तब अध्यक्ष उस मामले पर निर्णय ले सकता है।'' आचारी ने कहा कि बागी समूह को निर्वाचन आयोग के पास जाकर यह कहना होगा कि उसके पास सबसे अधिक संख्या में सांसद और विधायक हैं तथा पार्टी की संगठनात्मक शाखा पर उसका नियंत्रण है।
उन्होंने कहा कि इसके बाद निर्वाचन आयोग दोनों धड़ों का पक्ष सुनकर मामले की जांच करेगा और ऐसा फैसला करेगा जो न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर खरा उतर सके। आचारी ने दलबदल विरोधी कानून और संविधान की 10वीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा कि फिलहाल बागी सांसदों को अलग समूह नहीं माना जा सकता और उन्हें अलग सीट आवंटित नहीं की जा सकतीं क्योंकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को लोकसभा में पहले ही सीट आवंटित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अभी बागी नेताओं को अलग मान्यता प्राप्त समूह का दर्जा नहीं मिला है इसलिए उनके लिए बैठने की फिलहाल अलग व्यवस्था नहीं की जा सकती।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद राज्य और केंद्र में अपने कई नेताओं की बगावत से तृणमूल कांग्रेस में उथल-पुथल मची हुई है। लोकसभा में पार्टी के 28 सदस्य और राज्यसभा में 13 सदस्य हैं जिनमें से अब तक तीन इस्तीफा दे चुके हैं। संकट से घिरी तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को शनिवार को उस समय एक और झटका लगा जब उनके करीबी राजनीतिक सहयोगियों में शामिल सुदीप बंद्योपाध्याय बागी खेमे में शामिल हो गए। यह खेमा लोकसभा अध्यक्ष बिरला से संपर्क कर खुद को ''असली तृणमूल'' संसदीय दल के रूप में मान्यता दिलाने की तैयारी कर रहा है।
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