बलिया स्थित सुरहा ताल देश का 100वां व उत्तर प्रदेश का 13वां रामसर साइट्स बना

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बलिया, शुक्रवार, 05 जून 2026। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सुरहा ताल क्षेत्र स्थित जयप्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य को देश का 100वां रामसर स्थल घोषित किया गया है। सुरहा ताल, एशिया के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण प्राकृतिक जल निकायों में से एक है। इस घोषणा के साथ ही यह महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल कर चुकी है। यह निर्णय विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर किया गया और केंद्र सरकार ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की। लखनऊ में आयोजित एक समारोह में प्रदेश के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने इसका प्रमाण पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा।

उन्होंने बताया कि इस मौके पर उत्तर प्रदेश के रामसर स्थलों पर आधारित बुकलेट और डॉकेट भी जारी किए गए। इस मान्यता के बाद उत्तर प्रदेश में रामसर स्थलों की संख्या 13 हो गई है। रामसर स्थल वे प्राकृतिक आर्द्र क्षेत्र हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण दिया जाता है ताकि पर्यावरण और जैव विविधता सुरक्षित रह सके। सुरहा ताल, जो एक प्राकृतिक गोखुर झील है, लगभग 2,549 से 3,432 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है और मानसून में इसका विस्तार लगभग 42 वर्ग किलोमीटर तक हो जाता है। यह गंगा और सरयू के दोआब क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण जलस्रोत है।

रामसर कन्वेंशन के तहत किसी भी आर्द्रभूमि को वैश्विक महत्व की मान्यता मिलती है, जिससे संरक्षण और विकास के लिए वैज्ञानिक व वित्तीय सहयोग के अवसर बढ़ते हैं। यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए सेंट्रल एशियन फ्लाइवेज का अहम पड़ाव है, जहां सर्दियों में साइबेरिया सहित कई ठंडे देशों से हजारों पक्षी आते हैं। सारस, बत्तख और जलकाग जैसी कई प्रजातियाँ यहां देखी जाती हैं। अधिकारियों के अनुसार इस दर्जे से क्षेत्र में पारिस्थितिकी पर्यटन, रोजगार, जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा। सुरहा ताल का पारिस्थितिक तंत्र स्थानीय जल संतुलन और भूजल पुनर्भरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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