दिल्ली सरकार ने निजी क्षेत्र में दो दिन के 'वर्क फ्रॉम होम', ऑफिस समय में बदलाव की सलाह दी
नई दिल्ली, रविवार, 17 मई 2026। दिल्ली सरकार ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ईंधन बचाने के प्रयासों में सहयोग के लिए निजी कंपनियों और प्रतिष्ठानों को दो दिन की 'वर्क-फ्रॉम-होम' नीति अपनाने, कार्यालय के समय में बदलाव करने और कर्मचारियों से 'कार पूलिंग' और सार्वजनिक परिवहन का लाभ उठाने का आग्रह किया है। दिल्ली श्रम विभाग द्वारा जारी परामर्श में अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों, बिजली, पानी, स्वच्छता और संबंधित नगरपालिका सेवाओं जैसी आवश्यक, आपातकालीन सेवाओं में शामिल निजी संस्थाओं को शामिल नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस सप्ताह की शुरुआत में 90-दिवसीय 'मेरा भारत, मेरा योगदान' ईंधन बचत अभियान शुरू किया, जिसमें दिल्ली सरकार के सभी कर्मचारियों के लिए दो दिन घर से काम करने और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा था कि संसाधनों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल के संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील के जवाब में निजी क्षेत्र को भी ईंधन-बचत पहल का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
श्रम विभाग ने रविवार को जारी परामर्श में कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनज़र पेट्रोल, डीजल और सीएनजी जैसे ईंधनों की बचत करना तथा उनका सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसमें कहा गया है कि राजधानी में रोजाना वाहनों द्वारा होने वाली ईंधन खपत में दफ्तर आने-जाने का बड़ा योगदान होता है। परामर्श में कहा गया कि 'वर्क-फ्रॉम-होम' व्यवस्था अपनाकर ईंधन की खपत का बड़ा हिस्सा कम किया जा सकता है। कोविड-19 महामारी और चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (ग्रैप) प्रतिबंधों के दौरान इसकी संचालन संबंधी व्यवहार्यता भी साबित हो चुकी है।
परामर्श में कहा गया, ''राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन बचत के प्रयासों में योगदान देने के लिए दिल्ली के सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों, कारखानों, दुकानों और आईटी और आईटीईएस (आईटी संबद्ध सेवाएं) क्षेत्र समेत वाणिज्यिक संस्थानों के नियोक्ताओं को सप्ताह में कम से कम दो दिन 'वर्क-फ्रॉम-होम' लागू करने के लिए जोरदार तरीके से प्रोत्साहित किया गया है।'' इस परामर्श में सड़कों पर व्यस्त समय के दौरान वाहनों की भीड़ को कम करने के लिए अलग-अलग कार्य घंटों को लागू करने, कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन, 'कार-पूलिंग' या गैर-मोटर चालित आवागमन के साधनों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करने का भी सुझाव दिया गया।
परामर्श में यह भी सलाह दी गई कि यात्रा खर्च घटाने के लिए प्रत्यक्ष बैठकों को डिजिटल या ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया जाए, गैर-जरूरी यात्राओं में आधिकारिक वाहनों का कम से कम इस्तेमाल हो और निर्बाध 'वर्क-फ्रॉम-होम' व्यवस्था के लिए पर्याप्त आईटी ढांचा उपलब्ध कराया जाए। निजी क्षेत्र को भी आवागमन के विकल्प चुनकर पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की खपत को कम करने और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारतीय निर्मित उत्पादों को खरीदने का संकल्प लेने की सलाह दी गई है।
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