विश्वासघात मामले में वित्तीय सलाहकार को दो साल की सजा

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ठाणे, रविवार, 17 मई 2026। ठाणे की एक अदालत ने एक महिला की शिकायत पर दर्ज आपराधिक विश्वासघात के मामले में वित्तीय सलाहकार को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है और 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। विशेष न्यायाधीश जी. टी. पवार ने हालांकि आरोपी मटेश्वर आर. गिरि को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत धोखाधड़ी के आरोप के साथ-साथ अनियमित जमा योजनाओं पर रोक कानून के कड़े प्रावधानों से यह कहते हुए बरी कर दिया कि यह कानून अपराध होने के बाद लागू हुआ था। शनिवार को सुनाए गए फैसले में अदालत ने आदेश दिया कि 30 लाख रुपये का जुर्माना वसूल होते ही पूरी रकम महाराष्ट्र के ठाणे निवासी पीड़िता महिला को मुआवजे के रूप में दी जाए।

अभियोजन पक्ष के अनुसार महिला के पति और भाई की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उसने मुआवजे की पूरी रकम और एक व्यावसायिक दुकान बेचकर मिले कुल 51.5 लाख रुपये जुलाई 2017 से अप्रैल 2018 के बीच गिरि के पास निवेश किए। अभियोजन पक्ष के अनुसार मुंबई के बांद्रा में फर्म संचालित करने वाले गिरि ने 'म्युचुअल फंड' के जरिए सालाना 12 फीसदी रिटर्न का वादा किया था। इसके अनुसार गिरि ने जनवरी 2021 तक नियमित लाभांश दिया, लेकिन उसके बाद भुगतान बंद कर दिया और मूल रकम भी नहीं लौटाई।

अभियोजन के मुताबिक आरोपी ने 32.46 लाख रुपये की बकाया राशि नहीं चुकायी। अदालत के आदेश के बाद उसने 13.86 लाख रुपये जमानत प्रक्रिया के दौरान जमा किए, जिससे बकाया 18.6 लाख रुपये रह गया। अदालत ने कहा कि साबित तथ्यों से आईपीसी की धारा 406 के तहत आपराधिक विश्वासघात का अपराध बनता है, इसलिए आरोपी को धोखाधड़ी का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि आरोपी ने रकम मिलने की बात मानी, लेकिन वास्तविक निवेश का कोई सबूत नहीं दे सका। अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 406 के तहत दोषी करार देते हुए कहा कि जुर्माना नहीं चुकाने पर उसे तीन महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।

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