भारत-अफ्रीका साझेदारी अशांत विश्व में स्थिरता का संदेश देगी: जयशंकर

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नई दिल्ली, गुरुवार, 23 अप्रैल 2026। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि ऐसे वक्त में जब दुनिया जटिल भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है, भारत-अफ्रीका साझेदारी का विशेष महत्व है और यह एक अशांत और अनिश्चित दुनिया में 'स्थिरता' तथा 'विश्वसनीयता' का संदेश देगी। जयशंकर ने आगामी 'भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन-4' के लोगो, थीम और वेबसाइट के अनावरण के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और अफ्रीका न केवल विकास साझेदार हैं, बल्कि ''एक बेहतर दुनिया को आकार देने में भी साझेदार'' हैं। उनकी ये टिप्पणियां दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हो रहे कई संघर्षों की पृष्ठभूमि में आई हैं, जिनमें पश्चिम एशिया का संघर्ष भी शामिल है जो 50 से अधिक दिन से जारी है और वैश्विक स्तर पर असर डाल रहा है।

आगामी शिखर सम्मेलन के लोगो में भारत और अफ्रीका के आपस में जुड़े हुए मानचित्रों को दर्शाने वाली छवि पर एक शेर की आकृति अंकित है। इसका विषय 'स्थायी साझेदारी साझा दृष्टिकोण' है और शिखर सम्मेलन 28 से 31 मई तक होगा। विदेश मंत्री ने कहा, ''ऐसे वक्त में जब दुनिया जटिल भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है, हमारी साझेदारी का विशेष महत्व है। यह अशांत दुनिया में स्थिरता, अनिश्चितता में विश्वसनीयता और कठिन समय में एकजुटता का संदेश होगा।'' इस कार्यक्रम में विभिन्न अफ्रीकी देशों के कई राजदूतों और राजनयिकों ने भाग लिया।

जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत ने हाल के वर्षों में अफ्रीका में 17 नए मिशन खोलकर अपनी राजनयिक उपस्थिति का विस्तार किया है, जिससे अफ्रीका में भारतीय मिशनों की संख्या 46 हो गई है। जयशंकर ने कहा कि आज अफ्रीका भारत की विदेश नीति में अहम स्थान रखता है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत-अफ्रीका संबंध "हमारे सभ्यतागत संबंधों" पर आधारित हैं, जो सदियों से सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संबंध के माध्यम से विकसित हुए हैं। उन्होंने कहा, ''उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष में भारत ने अफ्रीकी देशों के प्रति एकजुटता दिखाई थी और इससे हमारे संबंध और भी मजबूत हुए।''

विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की कहानी अफ्रीका से भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा, ''संघर्ष, एकजुटता, लचीलेपन और आकांक्षाओं का हमारा साझा इतिहास हमारी साझेदारी को आकार देता है।'' मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना और अफ्रीका का 'एजेंडा 2063' सतत विकास और समावेशी विकास के माध्यम से समृद्धि और प्रगति की दिशा में पूरक रोडमैप हैं।

जयशंकर ने यह भी कहा कि कई उच्च स्तरीय राजनीतिक वार्ताओं के साथ भारत और अफ्रीका के बीच प्रमुख स्तंभों पर संबंध मजबूत हुए हैं, और भारत वैश्विक व्यवस्था में अफ्रीका के उचित स्थान का लगातार समर्थन कर रहा है। मंत्री ने कहा कि इस दिशा में एक "महत्वपूर्ण कदम" 2023 में भारत की जी20 की अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को समूह में शामिल करना था। उन्होंने कहा, "यह हमारे इस दृढ़ विश्वास को दर्शाता है कि आने वाले समय में वैश्विक शासन को दिशा देने में ग्लोबल साउथ की आवाज़ों का विशेष महत्व होगा।''
 

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