वायुसेना के विशेष बल 'गरुड़' को उन्नत रेंज, मारक क्षमता वाली यूएवी प्रणाली मिलेगी

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नई दिल्ली, रविवार, 19 अप्रैल 2026। सरकार ने भारतीय वायुसेना की विशिष्ट इकाई के लिए एक कॉम्पैक्ट मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) प्रणाली की खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो मुश्किल जलवायु परिस्थितियों में और समुद्र तल से 16,400 फुट तक की ऊंचाई पर काम कर सकती है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित प्रणाली का उद्देश्य विभिन्न भूभागों और जलवायु परिस्थितियों में ''ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निगरानी'' और परिचालन सहायता प्रदान करना है। मौजूदा प्रणाली की तुलना में इसकी मारक और परिचालन क्षमता भी अधिक होने की परिकल्पना की गई है।

रक्षा मंत्रालय ने हाल में भारतीय वायुसेना के गरुड़ विशेष बल के लिए ''माइक्रो यूएवी' प्रणाली की खरीद के संबंध में अनुरोध पत्र जारी किया है। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित प्रणाली सतत निगरानी, ​​लक्ष्य प्राप्ति और वास्तविक समय में स्थिति की जानकारी प्रदान करने में भी सक्षम होनी चाहिए।

परियोजना से वाकिफ एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारतीय वायुसेना की इस विशिष्ट इकाई के पास वर्तमान में ''इसी तरह की प्रणाली'' है, और नयी प्रणाली उन्नत और नवीनतम विशिष्टताओं वाली भारत में निर्मित होगी। अधिकारी ने कहा, ''इस प्रणाली को चरम जलवायु परिस्थितियों में काम करने की आवश्यकता है, जिसमें शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे से लेकर 50 डिग्री सेल्सियस तापमान तक और समुद्र तल से 16,400 फुट तक की ऊंचाई शामिल है।'' उन्होंने बताया कि प्रस्तावित प्रणाली को अधिक दूरी तक कार्य करने और लंबे समय तक संचालन में सक्षम बनाने की योजना है।

एक अधिकारी ने योजना के अनुसार इसके कुछ प्रमुख प्रदर्शन मापदंडों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसकी न्यूनतम मिशन रेंज 15 किलोमीटर, कम से कम 60 मिनट परिचालन और "दो व्यक्तियों की टीम द्वारा संचालित होने की क्षमता" होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि दो व्यक्तियों की टीम द्वारा संचालित होने योग्य प्रणाली का अर्थ है कि प्लेटफॉर्म को दो व्यक्ति उठा सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रणाली जीपीएस-विहीन वातावरण में भी काम करने में सक्षम होनी चाहिए और इसे भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (आईआर एनएसएस) के अनुरूप भी विस्तारित बनाया जा सके।

अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित प्रणाली में हवाई वाहन, ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम, रिमोट वीडियो टर्मिनल, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल या इन्फ्रारेड पेलोड, पावर सिस्टम, फील्ड रिपेयर किट और रेडियो फ्रीक्वेंसी डेटा लिंक जैसे कई एकीकृत घटक शामिल होंगे। इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाना और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देना है, साथ ही विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता को कम करना है। इस महीने की शुरुआत में, एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि सरकार ने भारतीय वायुसेना के लिए एक मानवरहित लड़ाकू खोज और बचाव विमान के डिजाइन और विकास की परिकल्पना की है, जिसका उपयोग पायलट वाले विमानों को जोखिम में डाले बिना विमान चालक दल को बचाने के मिशन में किया जा सकता है। रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीएपी) 2020 के तहत परिकल्पित इस परियोजना को ''सैद्धांतिक रूप से मंजूरी'' दे दी गई है।

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