सिद्धरमैया ने दक्षिण भारत में उच्चतम न्यायालय की पीठ स्थापित करने की जरूरत पर बल दिया
बेंगलुरु, शनिवार, 18 अप्रैल 2026। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने उच्चतम न्यायालय तक देशवासियों की पहुंच आसान बनाने की जरूरत पर बल देते हुए शनिवार को कहा कि दक्षिण भारत में न्यायालय की एक पीठ स्थापित करने से न्याय सुनिश्चित करने में काफी मदद मिलेगी। सिद्धरमैया ने 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में न्यायपालिका की पुनर्कल्पना' विषय पर आयोजित राज्य-स्तरीय न्यायिक अधिकारियों के 22वें द्विवार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में किसी न्यायाधीश की ताकत एल्गोरिद्म की ताकत से कम नहीं आंकी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ''नयी संभावनाएं खोजने के साथ साथ हमें न्यायपालिका के सामने मौजूद स्थायी चुनौतियों को भी ध्यान में रखना होगा। लंबित मामलों की समस्या अब भी गंभीर है, जो समय पर न्याय मिलने में बाधा बनती है। प्रौद्योगिकी इससे निपटने में मदद कर सकती है, लेकिन इसके साथ बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना, न्यायिक क्षमता बढ़ाना और अदालतों की प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण भी जरूरी है।''
मुख्यमंत्री ने कहा, ''देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच बेहतर बनाने की सख्त जरूरत है। दक्षिण भारत में उच्चतम न्यायालय की एक पीठ स्थापित करने से न्याय सुनिश्चित करने में काफी मदद मिलेगी।'' इस कार्यक्रम में भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बी. वी. नागरत्ना एवं न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कहा, ''हम ऐसे दौर में हैं, जहां कानून और प्रौद्योगिकी अलग-अलग क्षेत्र नहीं रहे, बल्कि शासन, अधिकारों और न्याय के लिए परस्पर जुड़ी शक्तियां बन चुके हैं।"
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