परिसीमन में तमिलनाडु को नुकसान पहुंचा तो व्यापक आंदोलन होगा: स्टालिन

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चेन्नई, मंगलवार, 14 अप्रैल 2026। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने मंगलवार को आगाह किया कि अगर राज्य को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कदम उठाया गया तथा परिसीमन में उत्तरी राज्यों की लोकसभा सीटों की संख्या में विषमतापूर्वक वृद्धि हुई तो प्रदेश में बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा और पूरी ताकत से विरोध किया जाएगा। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को गोपनीय रखा गया है। स्टालिन ने दावा किया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार न केवल द्रमुक, बल्कि किसी भी राजनीतिक दल या किसी भी राज्य से परामर्श किए बिना परिसीमन प्रक्रिया को एकतरफा आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा, "हमें यह भी नहीं पता कि परिसीमन की यह प्रक्रिया कैसे पूरी की जाएगी। प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन के संबंध में अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।" स्टालिन ने कहा, इस प्रक्रिया को लेकर इतनी गोपनीयता बरतने के कारण इसमें गंभीर खतरे की आशंका और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों के लोग गहरी चिंता में डूबे हुए हैं। स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावों के बीच संसद के 16 अप्रैल के विशेष सत्र को "जबरदस्ती बुलाया गया" है। उन्होंने आरोप लगाया, "इस सत्र में केंद्र सरकार परिसीमन पर एक संवैधानिक संशोधन को जबरन पारित करना चाहती है।"

उन्होंने यह दावा किया कि केंद्र तमिलनाडु सहित दक्षिणी राज्यों पर अपना निर्णय थोपना चाहती है। उन्होंने कहा, "परिसीमन को जल्दबाजी में थोपने का यह प्रयास भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार द्वारा लोकतंत्र पर किया गया एक बड़ा प्रहार है। यह राज्यों के अधिकारों पर सीधा हमला है।" उन्होंने कहा, ''इस समय, मैं केंद्र की भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कुछ महत्वपूर्ण बात कहना चाहता हूं। संसद सत्र में हमारे सांसद भाग लेंगे। अगर ऐसा कुछ भी किया जाता है जो तमिलनाडु को नुकसान पहुंचाने वाला हो, या जो उत्तरी राज्यों की राजनीतिक शक्ति को असमान रूप से बढ़ाता है, तो हम तमिलनाडु में चुप नहीं रहेंगे।"

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता ने आगाह किया कि ऐसी स्थिति में तमिलनाडु ठप हो जाएगा। उन्होंने कहा, ''तमिलनाडु पूरी ताकत से अपना विरोध दर्ज कराएगा। हर परिवार सड़कों पर उतरेगा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में मेरे नेतृत्व में, हम एक बड़ा आंदोलन करेंगे।" द्रमुक के प्रमुख ने कहा चुनाव का समय होने और "ध्यान कहीं और होने के कारण आप दिल्ली में चुपचाप परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। ऐसा विचार मन में भी न लाएं।" स्टालिन ने कहा कि वह केवल तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि द्रमुक के नेता के रूप में बोल रहे हैं। उन्होंने कहा, "भारत एक बार फिर 1950 और 1960 के दशक वाले द्रमुक के जज्बे का गवाह बनेगा। इसे धमकी समझने की भूल न करें। यह एक चेतावनी है। भले ही आप इसकी व्याख्या धमकी के रूप में करना चाहें, हमें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हां, यह तमिलनाडु की ओर से जारी एक चेतावनी है।" मुख्यमंत्री ने कहा, "संविधान के जनक बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती पर मैं पूरी गंभीरता के साथ यह बात कह रहा हूं।"

उन्होंने कहा कि पिछले साल उन्होंने इस प्रक्रिया से प्रभावित होने वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं को एक साथ लाया गया था। स्टालिन ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने तमिलनाडु से जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने का आग्रह किया, तो राज्य ने उसका पालन किया। उन्होंने सवाल किया, "क्या अब हमें वही करने की सजा दी जा रही है जो हमसे कहा गया था? हमने मांग की थी कि प्रधानमंत्री संसद में स्पष्ट आश्वासन दें कि दक्षिण के राज्य इससे प्रभावित नहीं होंगे। लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।" द्रमुक प्रमुख ने कहा कि विभिन्न दलों के सांसदों ने प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा था, लेकिन उसे भी अस्वीकार कर दिया गया।

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