मोबाइल आई-केयर यूनिट द्वारा प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में नेत्र जांच एवं उपचार हो रहा सुलभ- मुख्यमंत्री शर्मा

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जयपुर, शुक्रवार, 13 मार्च 2026। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की वार्षिक कॉन्फ्रेंस में नेत्र-चिकित्सा पर ज्ञान का आदान-प्रदान होगा। साथ ही, इसमें नई तकनीकों और नवाचारों पर चर्चा होगी, जिससे देश-विदेश के नेत्र चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों के बीच आपसी सहयोग प्रगाढ़ बनेगा। उन्होंने कहा कि एआईओसी 2026 एक नई दृष्टि, नई सोच और नए भारत के निर्माण का संकल्प मंच है। इसके निष्कर्ष, विचार एवं संकल्प नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में नया अध्याय लिखेंगे। इससे आने वाली नई तकनीकों, दवाइयों एवं शल्य चिकित्सा पद्धतियांे को प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अपनाने के लिए हमारी सरकार हर संभव सहयोग करेगी। 

शर्मा गुरुवार को जेईसीसी, सीतापुरा में ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की 84वीं वार्षिक कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में देश में अभूतपूर्व काम हुए हैं। मेडिकल कॉलेज खुले हैं तथा भविष्य में चिकित्सा क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिए काम किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में ‘हेल्थी आईज-हैप्पी लाईव्स’ का संदेश सामाजिक सोच की अद्भुत मिसाल है। 

एआईओसी लाखों लोगों के जीवन में उजाला लाने का बनेगी माध्यम-

मुख्यमंत्री ने कहा कि दृष्टि हमारे जीवन की गुणवत्ता, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी से सीधे जुड़ी है। भारत में करोडों लोग दृष्टिहीनता या दृष्टि दोष से प्रभावित हैं, जिनमें बड़ी संख्या ग्रामीण एवं गरीब वर्ग की है। इसलिए तकनीकी नवाचार, जन जागरूकता और नीतिगत इच्छाशक्ति से अंधता का उन्मूलन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की वैज्ञानिक चर्चाएं, शोध एवं नवाचार लाखों लोगों के जीवन में उजाला लाने का माध्यम बनेंगी।

घर-घर पहुंच रहा ‘एक दान, दो जीवनों में रोशनी’ का संदेश-

शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत गरीब एवं मध्यम वर्ग के नागरिकों को नेत्र रोग संबंधी उपचार निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही, स्कूल आई-स्क्रीनिंग कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में दृष्टि दोष की पहचान एवं उपचार भी सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जीवन ज्योति प्रोजेक्ट के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल आई-केयर यूनिट द्वारा दूरस्थ इलाकों में नेत्र जांच एवं उपचार मिल रहा है। नेत्रदान जागरूकता अभियान को जन-आंदोलन का रूप देते हुए ‘एक दान, दो जीवनों में रोशनी’ का संदेश घर-घर पहुंच रहा है। 

उन्होंने कहा कि मधुमेह जनित अंधेपन की रोकथाम के लिए विशेष स्क्रीनिंग कार्यक्रम शुरू किए हैं। राजस्थान आज तकनीकी नवाचार में भी तेजी से प्रगति कर रहा है। एआई आधारित रेटिनल स्क्रीनिंग, टेलीमेडिसिन एवं डिजिटल आई-केयर के माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाएं पहुंचाने की दिशा में हम काम कर रहे हैं। 

चिकित्सा ढांचे को मजबूत बना रही राज्य सरकार-

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए हमारी सरकार निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में एमबीबीएस की 1700 सीटें, पीजी (राजकीय एवं निजी) की 469 सीटें तथा सुपर स्पेशियलिटी की 54 सीटें बढ़ाई गई हैं। केंद्र प्रवर्तित योजना के तीसरे चरण में 15 नवीन मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। उन्होंने कहा कि आरयूएचएस का उन्नयन करते हुए एम्स की तर्ज पर रिम्स की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। साथ ही, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के अंतर्गत 815 करोड़ रुपये की लागत से 31 क्रिटिकल केयर ब्लॉक भी बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 2 का निर्माण पूर्ण हो चुका है।

शर्मा ने कहा कि नेत्र-चिकित्सकों के हाथों में अंधेरे जीवन में रोशनी भरने की शक्ति है, जो ईश्वरीय वरदान से कम नहीं है। वे टेक्नोलॉजी, ज्ञान एवं अपना अनुभव सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जोड़ें, ताकि राजस्थान के हर नागरिक को स्वस्थ दृष्टि मिले। उन्होंने चिकित्सकों से ग्रामीण राजस्थान में कैम्प लगाने, निशुल्क जांच एवं नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

उल्लेखनीय है कि 12 से 15 मार्च तक आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में दुनिया भर के 8 हजार से अधिक वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ, चिकित्सक एवं शोधकर्ता भाग लेंगे। इस कॉन्फ्रेंस में एक साथ 23 हॉलों में साइंटिफिक सेशन, लाइव सर्जरी ट्रेनिंग एवं वर्कशॉप का आयोजन भी किया जा रहा है। इसमें आधुनिक नेत्र-चिकित्सा उपकरणों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जिसमें आई-केयर की नवीनतम मशीनें देखने को मिलेंगी। मुख्यमंत्री ने डॉ. तारा प्रसाद दास एवं डॉ. एस नटराजन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया। इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. जीवन सिंह टिटियाल, डॉ. पार्थ बिस्वास, प्रोफेसर पीटर मैक्लुस्की, प्रोफेसर तेत्सुओ ओशिका सहित देश-दुनिया के नेत्र रोग विशेषज्ञ उपस्थित रहे। 

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