राज्यसभा में उठी भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग
नई दिल्ली, गुरुवार, 12 मार्च 2026। भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं सूची में शामिल करने की मांग करते हुए बृहस्पतिवार को राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी के मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि ऐसा होने पर शिक्षा, प्रशासन एवं सरकारी कामकाज में भोजपुरी भाषा का उपयोग हो सकेगा। शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए मिश्रा ने कहा कि भोजपुरी आज करोड़ों लोगों की मातृभाषा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, दिल्ली सहित देश के अनेक राज्यों में भोजपुरी भाषा बोली जाती है। उन्होंने कहा कि यह भाषा मॉरीशस, फिजी, गुयाना, सूरीनाम, टोबैगो, त्रिनिदाद, द. अफ्रीका, सिंगापुर, नेपाल और कैरेबियाई देशों में भी बोली जाती है। भाजपा सदस्य ने कहा कि अब तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच की कमेंट्री भी भोजपुरी में होने जा रही है। ''भारत का बिहार और उत्तर प्रदेश इस भाषा की जननी हैं।''
उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा की उन्नति और भाषा का विकास तब होता है जब हम उस भाषा के शिक्षक और प्राध्यापक तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि व्यापक उपयोग, समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत के बावजूद भोजपुरी भाषा को संवैधानिक मान्यता और राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल पाई है। ''इसीलिए शिक्षा, प्रशासन एवं सरकारी कामकाज में भोजपुरी भाषा का उपयोग नहीं हो पाता ।'' मिश्रा ने भोजपुरी को संविधान की आठवीं सूची में शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब देश की अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्द्धन की बात हो रही है तो भोजपुरी पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
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