स्नातक 'विकसित भारत' के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

img

नई दिल्ली, शनिदेव, 28 फरवरी 2026। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने स्नातकों को 'विकसित भारत' के सपने का वास्तुकार बताते हुए शनिवार को कहा कि विश्वविद्यालयों को ऐसे अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना चाहिए, जो भारतीय परिस्थितियों से जुड़े हों और साथ ही वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी हों। वह यहां दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के 102वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष 70 प्रतिशत से अधिक स्वर्ण पदक विजेता महिलाएं हैं।

समारोह में 1.2 लाख से अधिक छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। कार्यक्रम में राधाकृष्णन मुख्य अतिथि थे, जबकि समारोह की अध्यक्षता डीयू के कुलपति योगेश सिंह ने की। राधाकृष्णन ने कहा कि डीयू की शुरुआत तीन कॉलेज, दो संकाय और आठ विभागों से हुई थी। उन्होंने कहा, ''आज विश्वविद्यालय 16 संकायों, 86 विभागों, 90 कॉलेजों, 20 हॉल और छात्रावासों, 30 से अधिक केंद्रों व संस्थानों, 34 पुस्तकालयों और छह लाख से अधिक छात्रों के साथ एक विशाल संस्थान बन चुका है।'' उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय शिक्षकों, प्रशासकों और छात्रों के सामूहिक प्रयासों को दिया। विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि कुलपति योगेश सिंह ने उन्हें बताया कि सीट बिना किसी देरी के भर जाती है और 'कट-ऑफ' 98 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।

उन्होंने कहा कि हालांकि डीयू पहले से ही भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों में शामिल है, फिर भी उसे वैश्विक रैंकिंग में और ऊंचा स्थान हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। राधाकृष्णन ने कहा, ''अगले दो वर्षों में हमें शीर्ष 300, फिर 200, फिर 100 में स्थान बनाना चाहिए और अंतत: दुनिया का पहले नंबर का विश्वविद्यालय बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।'' कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु चुनौतियों और लोकतंत्र पर बढ़ते दबावों के दौर में उन्होंने कहा, ''आपकी डिग्री केवल प्रमाण पत्र नहीं बल्कि मानवता और राष्ट्र के प्रति एक प्रतिबद्धता है।'' उन्होंने छात्रों से आजीवन सीखने की भावना बनाए रखने, नशीले पदार्थों से दूर रहने और अपनी उपलब्धियों से परिवार, विश्वविद्यालय और देश का नाम रोशन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण में स्नातक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों को ऐसे अनुसंधान, उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देना चाहिए जो भारतीय परिस्थितियों से जुड़े हों और वैश्विक स्तर पर भी प्रतिस्पर्धी हों। उन्होंने यह भी कहा कि इस वर्ष 70 प्रतिशत से अधिक स्वर्ण पदक विजेता महिलाएं हैं और महिला स्नातकों की संख्या पुरुषों से अधिक है, जो देश की शैक्षिक प्रगति का संकेत है। डीयू के अनुसार, 2025 में स्नातक, स्नातकोत्तर और चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम 'एफवाईयूपी' के तहत अपना पाठ्यक्रम पूरा करने वाले 1,20,408 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जबकि लगभग 750 पीएचडी शोधार्थियों को मानद उपाधि दी गई। विश्वविद्यालय के अनुसार, समारोह में कुल 132 स्वर्ण और रजत पदक तथा पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

Similar Post

LIFESTYLE

AUTOMOBILES

Recent Articles

Facebook Like

Subscribe

FLICKER IMAGES

Advertisement