व्यापार समझौता दबाव में हुआ, प्रधानमंत्री ने समर्पण कर दिया: कांग्रेस

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नई दिल्ली, शनिवार, 07 फरवरी 2026। कांग्रेस ने शनिवार दावा किया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते से भारत को फायदा नहीं हुआ, बल्कि अमेरिका का लाभ हुआ है क्योंकि यह समझौता दबाव में किया गया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समर्पण कर दिया। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि "नमस्ते ट्रंप" , "हाउडी मोदी" पर भारी पड़ गया है। "नमस्ते ट्रंप" और "हाउडी मोदी" ट्रंप के पिछले कार्यकाल के दौरान भारत एवं अमेरिका के रिश्तों से जुड़े दो बड़े राजनीतिक–कूटनीतिक कार्यक्रम थे,जिनका आयोजन क्रमशः अहमदाबाद और ह्यूस्टन में हुआ था।

रमेश ने कहा, "अभी तक इस समझौते के विवरण घोषित नहीं किए गए हैं, उनके बारे में शायद आने वाले कुछ महीनों में बताया जाए। लेकिन जो संयुक्त बयान जारी हुआ है, उससे कुछ बातें बिल्कुल साफ़ हैं। पहली, हम अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क को खत्म करेंगे या कम करेंगे। यह साफ़ तौर पर अमेरिकी किसानों के लिए फ़ायदे की बात है, भारतीय किसानों के लिए नहीं।" उन्होंने कहा, "दूसरी बात, जो बिल्कुल स्पष्ट है, वह यह है कि हम रूसी तेल का आयात बंद करने जा रहे हैं और अलग से अमेरिकी सरकार ने यह भी ऐलान कर दिया है कि अगर हम रूस से सीधे या परोक्ष रूप से तेल आयात करते हैं, तब भी हम पर 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क लगाया जाएगा।"

उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते में भारत के हितों की पूर्ति नहीं हुई है। रमेश ने दावा किया, "प्रधानमंत्री संसद में घबराए हुए नज़र आए, वह असहज थे। वे लोकसभा में नहीं आए। वे राज्यसभा में आए और वहां 97 मिनट का चुनावी भाषण दिया, जिसमें उन्होंने सिर्फ़ कांग्रेस को निशाना बनाया और विपक्ष द्वारा उठाए गए किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। मोदी ने जिस तरह की 'गले मिलने की कूटनीति की है, कई तस्वीरें उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ खिंचवाई है, उसके बावजूद यह व्यापार समझौता ऐसा नहीं है जिसके बारे में हम कह सकें कि हमारे हितों को आगे बढ़ाया गया है।"

रमेश ने 'एक्स' पर व्हाइट हाउस के एक बयान का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए पोस्ट किया, "अमेरिका अब इस पर नजर रखेगा कि भारत रूस से तेल आयात कर रहा है या नहीं। यदि अमेरिका निर्णय लेता है कि भारत ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूसी तेल का आयात किया है तो अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ जुर्माना वापस आ जाएगा। यह सचमुच असाधारण है और मोदी सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया है।" उनका कहना है, "अमेरिका से भारत का वार्षिक आयात तीन गुना हो जाएगा, जिससे हमारा लंबे समय से चला आ रहा वस्तुओं का व्यापार अधिशेष खत्म हो जाएगा। अमेरिका को भारत की आईटी और अन्य सेवाओं के निर्यात को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।"

रमेश ने संयुक्त बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि भारत के अमेरिका को वस्तुओं के निर्यात पर पहले से अधिक शुल्क लगाया जाएगा। कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के समक्ष समर्पण कर दिया है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "भारत सरकार अमेरिका के टाइम जोन के हिसाब से चल रही है, क्योंकि सारे निर्णय अमेरिका के हिसाब से हो रहे हैं। हमारे लिए इससे ज्यादा खेदजनक बात और कुछ नहीं हो सकती।"

खेड़ा ने दावा किया, "आमने-सामने बैठक बात करके जो समझौता हो उसे समझौता कहा जाता है, लेकिन जो ब्लैकमेल करके हो वह आत्मसमर्पण होता है।" उन्होंने आरोप लगाया, " मोदी जी ने अमेरिका के सामने झुक गये हैं, ये देख किसी भी भारतीय को अच्छा नहीं लगेगा। उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था, किसानी और हमारे हितों को हमारी ही थाली में परोसकर ट्रंप को दे दिया है। " खेड़ा का कहना था, "जो भारत हमेशा अमेरिका के शीर्ष नेताओं से आंखों में आंखें डालकर एक व्यावहारिक रिश्ते निभाता था, वो भारत कहां है? " उन्होंने दावा किया कि अदाणी-अंबानी के हितों के लिए भारत के आम नागरिकों के हितों को कुर्बान कर दिया गया है।

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