ईडी ने आंध्र प्रदेश कौशल विकास मामले में नया आरोपपत्र दाखिल किया

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नई दिल्ली, रविवार, 01 फरवरी 2026। प्रवर्तन निदेशालय ने आंध्र प्रदेश राज्य कौशल विकास निगम (एपीएसएसडीसी) सीमेंस परियोजना मामले में नया आरोपपत्र दाखिल करते हुए कहा है कि कुछ आरोपियों ने सरकारी निधियों का ‘‘दुरुपयोग’’ किया था, लेकिन अपराध की आय का धनशोधन करने में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की कोई भूमिका नहीं पाई गई। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआरसीपी की पिछली सरकार ने सितंबर 2023 में नायडू को इस मामले में गिरफ्तार किया था। आरोप था कि योजना में अनियमितताओं के कारण राज्य के खजाने को 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।

नायडू राजामहेंद्रवरम केंद्रीय जेल में 50 दिनों से अधिक समय तक बंद रहे थे, जिसके बाद आंध्र उच्च न्यायालय ने 31 अक्टूबर 2023 को उन्हें जमानत दे दी थी। विजयवाड़ा की एक स्थानीय अदालत ने भी हाल में राज्य सीआईडी ​​द्वारा इस मामले में दायर की गई ‘क्लोजर रिपोर्ट’ को स्वीकार कर नायडू के खिलाफ जांच बंद कर दी थी। ईडी का मामला सीआईडी ​​की प्राथमिकी पर आधारित है। अधिकारियों के अनुसार, संघीय जांच एजेंसी ने पूरक आरोपपत्र में कहा है कि उसकी जांच में इस मामले में अपराध की आय के ‘‘धनशोधन’’ में नायडू की कोई भूमिका नहीं पाई गई, इसलिए उन्हें कथित शिकायत में आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया।

ईडी ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि अदालत ने 28 जनवरी को इस नयी अभियोग शिकायत का संज्ञान लिया। कौशल विकास परियोजना उत्कृष्टता केंद्रों (सीओई) के समूह स्थापित करने से संबंधित थी, जिसकी कुल परियोजना लागत 3,300 करोड़ रुपये अनुमानित थी। नया आरोपपत्र आरोपी कंपनी डिजाइनटेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड (डीटीएसपीएल), इसके प्रबंध निदेशक विकास खानवेलकर, सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व प्रबंध निदेशक सौम्याद्री शेखर बोस उर्फ ​​सुमन बोस और उनके ‘करीबी सहयोगियों’ मुकुलचंद्र अग्रवाल, सुरेश गोयल और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ दायर किया गया है।

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