एसआईआर में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम कट जाने से भाजपा में घमासान मचा : अखिलेश यादव
लखनऊ, शनिवार, 27 दिसंबर 2025। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम कट जाने से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में घमासान मचा है। अखिलेश यादव ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा, “उत्तर प्रदेश भाजपा में मचे आपसी घमासान का कारण ऊपरी तौर पर भले कोई ‘विद्रोही बैठक’ हो, पर असल कारण ये है कि भाजपाई विधायकों के बीच ये समाचार पहले ही प्रसारित हो चुका है कि एसआईआर में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम कट गये हैं।” मीडिया में प्रसारित खबरों के मुताबिक, 23 दिसंबर को कुशीनगर जिले से भाजपा विधायक पी. एन. पाठक के लखनऊ स्थित आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में पार्टी के ब्राह्मण विधायकों की कथित रूप से बैठक हुई।
बैठक में पूर्वांचल और बुंदेलखंड के करीब 40 विधायकों ने हिस्सा लिया था हालांकि इस बैठक का कोई ब्यौरा नहीं मिल सका लेकिन इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। अखिलेश यादव ने इसी बैठक के संदर्भ को लेकर दावा किया, “बकौल ‘एक वर्ष-शेष’ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी के लगभग 85-90 प्रतिशत उनके अपने ही वोटर कटे हैं।” उन्होंने कहा, “अब इस आंकड़े को उत्तर प्रदेश की कुल 403 सीट से भाग दे दिया जाए तो ये आंकड़ा लगभग 61 हजार वोट प्रति सीट आएगा।” राज्य विधानसभा में कुल 403 सीट हैं। यादव ने कहा, “ऐसे में ये निष्कर्ष निकलता है कि भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश की हर एक सीट पर आनुपातिक रूप से 61 हजार वोट कम पाएगी। ऐसे में वो सरकार क्या बनाएगी, दहाई का अंक भी पार नहीं कर पायेगी।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “इसलिए आपसी लड़ाई अब एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप व टोका-टोकी व खुलेआम नोटिस के रूप में सामने आ रही है।” भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी के जन प्रतिनिधियों को आगाह किया कि वे किसी तरह की ‘नकारात्मक राजनीति’ का शिकार न बनें।
भाजपा के ब्राह्मण विधायकों की लखनऊ में 23 दिसंबर को हुई एक कथित बैठक को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच चौधरी ने बृहस्पतिवार रात जारी एक बयान में पार्टी विधायकों को चेतावनी दी। यादव ने कहा, “भाजपा के विधायक अलग-अलग बैठकें करके ये दिखा रहे हैं कि भाजपा सरकार, भाजपा संगठन व भाजपा के संगी साथी कोई भी उनकी नहीं सुन रहे हैं, इसलिए उनके कोई काम नहीं हो रहे हैं। ऐसे में जब चुनाव के पूर्व उनके कामों के आधार पर उनके मूल्यांकन का सर्वे करवाया जाएगा तो वो फेल हो जाएंगे।”
उन्होंने कहा, “यही वह बुनियादी कारण है कि वे सब इकट्ठे होकर अपनी सफाई देने में जुट गये हैं। भाजपा में चंद गिने-चुने लोगों के महाभ्रष्टाचार में से इन ‘असंतुष्टी से विद्रोह के स्तर तक’ पहुंचे लोगों के हिस्से बदनामी के छींटों के सिवा कुछ हाथ नहीं लगा है। एसआईआर ने भाजपा को अपने खोदे गड्ढे़ में ही गिरा दिया है।”
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