'विकसित दिल्ली' के विजन में योगदान देंगे द्वारका एक्सप्रेसवे और यूईआर-2: रेखा गुप्ता

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नई दिल्ली, रविवार, 18 अगस्त 2025। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने द्वारका एक्सप्रेसवे के राष्ट्रीय राजधानी के हिस्से और अर्बन एक्सटेंशन रोड (यूईआर)-2 के निर्माण के लिए शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया और कहा कि ये दोनों मार्ग 'विकसित दिल्ली' के विजन में योगदान देंगे। श्रीमती गुप्ता ने श्री मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए रविवार को दिल्लीवासियों की ओर से प्रधानमंत्री का हार्दिक अभिनंदन करते हुए कहा कि आपके नेतृत्व में राष्ट्र-निर्माण की यह गाथा केवल विकास की परियोजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और अंत्योदय की संकल्पना को मूर्त रूप प्रदान कर रही है। दिल्ली का यह स्वागत उस अटल विश्वास का प्रतीक है कि आने वाला कल और अधिक सशक्त, समृद्ध और संस्कारित भारत का होगा।

उन्होंने कहा, 'दिल्ली की मुख्यमंत्री होने के नाते आपके (श्री मोदी) नेतृत्व में पिछले पांच महीनों के प्रशासनिक अनुभव के आधार पर मैं कह सकती हूं कि आप देश के दूरदर्शी नेता हैं, जिनकी सोच में भारत का प्रत्येक नागरिक शामिल है। जिनकी नीतियां सुनिश्चित करती हैं कि भारत का प्रत्येक राज्य बराबर का भागीदार है। जिनके संकल्प से भारत का प्रत्येक नागरिक सुरक्षित महसूस करता है। आप वो ताकत हैं जिसने राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है। 

उन्होंने कहा कि इस सड़क मार्ग का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इससे सिंघु बॉर्डर से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक यात्रा का समय कम हो जाएगा। पहले लगभग दो घंटे लगते थे, लेकिन अब यह दूरी तय करने में केवल 40 मिनट लगेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, 'इससे आंतरिक और बाहरी रिंग रोड पर दबाव काफी कम हो जाएगा, साथ ही मुकरबा चौक, मधुबन चौक, पीरागढ़ी चौक, धौला कुआं और राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)-9 जैसे प्रमुख जंक्शनों पर अब भारी भीड़भाड़ नहीं रहेगी। इससे लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। 

इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि द्वारका एक्सप्रेसवे और यूईआर-2 जैसी ऐतिहासिक परियोजनाओं का उद्घाटन करने से पहले प्रधानमंत्री ने उन श्रमयोगियों से भेंट की, जिन्होंने अपने श्रम और समर्पण से इस सपने को साकार किया। हर उपलब्धि के मूल में खड़े श्रमयोगियों को सबसे पहले नमन करना, यह दृष्टि बताती है कि विकास केवल इमारतों और सड़कों का नहीं, बल्कि परिश्रम, सेवा और तपस्या के सम्मान का भी नाम है। विकसित भारत का यही पथ है, जहाँ श्रम का सम्मान राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बनता है।

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