महबूबा मुफ्ती ने अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह के लिए चिकित्सकीय देखभाल की केंद्र से अपील की
श्रीनगर, मंगलवार, 24 जून 2025। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को केंद्र सरकार से अपील की कि वह जेल में बंद अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह के जानलेवा बीमारी से जूझने के मद्देनजर "मानवीय दृष्टिकोण" अपनाते हुए उन्हें उचित चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराए। महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनुरोध है कि शब्बीर शाह की बेटी सहर शब्बीर की मार्मिक अपील पर तत्काल विचार करें। उनके पिता गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। इस नाजुक वक्त में हम केंद्र सरकार से आग्रह करते हैं कि वे मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं और यह सुनिश्चित करें कि उन्हें समुचित चिकित्सकीय देखभाल मिले। यह उनके परिवार के पास उनके दर्द को कम करने का अंतिम अवसर हो सकता है।”
पूर्व मुख्यमंत्री की यह अपील उस समय आई जब शाह की बेटी सहर शब्बीर ने अपने पिता के लिए “न्याय और करुणा” की एक भावनात्मक अपील सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने कहा, “यह राजनीतिक नहीं है। यह राष्ट्र-विरोधी नहीं है। यह किसी देश, संस्था या सरकार के खिलाफ नहीं है। यह केवल मेरे पिता के जीवन के बारे में है। उनकी सेहत के बारे में है। सम्मान से इलाज पाने के उनके अधिकार के बारे में है। क्या आपका जमीर जिंदा है?” सहर ने कहा कि उनके पिता ने बिना किसी दोष के 38 साल जेल में बिताए हैं।
उन्होंने कहा, “आज वे गंभीर रूप से बीमार हैं। उन्हें कई सारी सर्जरी की सलाह दी गई है। फिर भी उन्हें उचित देखभाल नहीं मिल रही है, न ही चिकित्सा रिकॉर्ड तक पहुंच है और न ही दो वर्षों में एक भी फोन कॉल की अनुमति मिली है, जो हर कैदी का अधिकार है।” उन्होंने कहा, “उनके परिवार को उनसे दूर रखा गया है। मैंने उन्हें चुपचाप पीड़ा झेलते देखा है। ध्वनिरोधी दीवारों, टूटे हुए माइक और लोहे की सलाखों के पीछे मैंने उन्हें देखा है। हम उन्हें छू तक नहीं सकते।”
सहर ने कहा, “पहले मेरी बात को गलत समझा गया था। एक बेटी की तरह बोलना कुछ और समझा गया। इसका मेरी मां और बड़ी बहन पर गहरा प्रभाव पड़ा। लेकिन कोई कितनी देर तक चुप रह सकता है जब उसके पिता इस हाल में हों?” सहर ने कहा कि उनका यह पोस्ट एक बेटी की ओर से “करुणा, न्याय और बुनियादी मानवता” के लिए अपील है। उन्होंने कहा, “अगर आपके भीतर अभी भी दिल है, तो कृपया मेरी बात सुनिए। अगर न्याय का कोई मतलब है, तो वह अब बोले। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। क्योंकि अगर एक बार फिर चुप्पी जीत गई, तो याद रखिएगा, आपको बताया गया था। आप जानते थे और फिर भी आपने मुंह फेर लिया।”
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