कांग्रेस ने आव्रजन संबंधी विधेयक से निरंकुशता बढ़ने की आशंका जतायी, स्थायी समिति में भेजने को कहा

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नई दिल्ली, बुधवार, 02 अप्रैल 2025। राज्यसभा में बुधवार को वरिष्ठ वकील एवं कांग्रेस सांसद अभिषेक सिंघवी ने आव्रजन संबंधी एक विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इसमें आव्रजन अधिकारी को असीमित अधिकार दिए गए हैं जिससे निरंकुशता का शासन बढ़ेगा। उन्होंने विधेयक को संसद की स्थायी समिति में भेजने की मांग की। उच्च सदन में आप्रवास एवं विदेशी विषयक विधेयक, 2025 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने इसका विरोध किया और कहा कि इस विधेयक से यह संदेश जाता है कि भारतीय संविधान में विदेशियों को कोई अधिकार नहीं प्रदान किए गए हैं। उन्होंने इस विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजने की मांग करते हुए कहा कि इसमें कोई पारदर्शिता नहीं है और इससे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रहार होगा। उन्होंने कहा कि आज विदेशी नागरिकों के लिए ऐसे कानून बनाये जा रहे हैं, कल हो सकता है कि देश के नागरिकों के लिए ऐसे कानून बनाये जायें।

उन्होंने कहा कि एक ओर हम ’वसुधैव कुटुंबकं, साफ्ट पॉवर एवं अतिथि देवो भव:’ की बात करते हैं वहीं इस विधेयक के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि सभी विदेशी संभावित रूप से अपराधी हैं जिन्हें भारत सन्देह की दृष्टि से देखता है। सिंघवी ने कहा कि इस विधेयक में एक आव्रजन अधिकारी को इतने अधिकार दिये हैं कि उसके आदेश के विरूद्ध कहीं कोई सुनवाई नहीं हो सकती। उन्होंने इसे ‘निरंकुशता का शासन’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के जरिये भारत में आने वाले विदेशी नागरिकों पर तमाम तरह की ऐसी शर्तें लगायी गयी हैं जो नैसर्गिक न्याय के अनुसार उचित नहीं ठहरायी जा सकती हैं। 

कांग्रेस सांसद ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा गया था कि पहले भी आव्रजन अधिकारी के निर्णय के विरूद्ध कोई अपील नहीं होने का प्रावधान था। सिंघवी ने कहा कि गृह मंत्री ने सदन को यह बात नहीं बतायी थी कि पहले आव्रजन अधिकारी को इतने अधिकार नहीं दिये गये थे विशेषकर दंडात्मक अधिकार। गौरतलब है कि यह विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है। कांग्रेस सदस्य ने कहा कि इस विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि आव्रजन अधिकारी किसी भी व्यक्ति के विदेश जाने पर रोक लगाने का आदेश दे सकता है। उन्होंने कहा कि आव्रजन अधिकारी को यह अधिकार देने के पीछे क्या कारण या तर्क है, इसको स्पष्ट नहीं किया गया है।

सिंघवी ने कहा कि इस विधेयक को देखकर वह यह कह सकते हैं कि यदि ऐसे प्रावधान पाकिस्तानी नागरिकों के लिए लाये जाते तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती किंतु अन्य सभी देशों के लोगों के लिए ऐसे नियम बनाने का क्या औचित्य है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है जिन्हें संविधान निर्माता डॉ बी आर आंबेडकर संविधान की आत्मा और दिल कहते थे। अनुच्छेद 14 में सभी लोगों को कानून के समक्ष बराबर माना गया है जबकि अनुच्छेद 21 व्यक्तिगत एवं जीवन की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है और सभी लोगो को मनमानी गिरफ्तारी से राहत देता है।

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