भाजपा नीत केंद्र सरकार केवल वोट के लिए तमिल प्रेम का दिखावा करती है : मुख्यमंत्री स्टालिन

img

चेन्नई, बुधवार, 05 मार्च 2025। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने बुधवार को केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी को तमिलों का ‘दुश्मन’ करार देते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार वोट की खातिर तमिल भाषा के प्रति केवल दिखावटी प्रेम रखती है । ‘हिंदी थोपे जाने का विरोध’ विषय पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित पत्र में स्टालिन ने इस मुद्दे पर द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के संस्थापक नेता सी. एन. अन्नादुरई के विचारों को याद किया। उनके अनुसार, दशकों पहले अन्ना ने कहा था कि पार्टी का उद्देश्य हिंदी का विरोध करना नहीं है, बल्कि तमिल सहित भारतीय भाषाओं को समान मान्यता दिलाना है।

स्टालिन ने आरोप लगाया कि भाजपा दावा करती है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तमिल को बहुत सम्मान देते है और त्रिभाषा फार्मूला राज्यों की भाषाओं के विकास के लिए है, लेकिन तमिल और संस्कृत के लिए धन के आवंटन में अंतर से यह स्पष्ट है कि वे तमिल के ‘दुश्मन’ हैं।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2023 के बीच की अवधि के दौरान केंद्र सरकार ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय को 2,435 करोड़ रुपये आवंटित किए और इसी अवधि में केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान को केवल 167 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘केंद्र सरकार पूरी तरह से भाषाई आधिपत्य की भावना के साथ काम कर रही है और वोट की खातिर तमिल को केवल दिखावटी समर्थन दे रही है।’’ 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार तमिलनाडु को मिलने वाली निधि और तमिल भाषा के लिए निधि का आवंटन नहीं करके धोखा दे रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हिंदी और संस्कृत जैसी ‘प्रभुत्व की भाषाओं’ के माध्यम से तमिल और अन्य राज्यों की भाषाओं को ‘नष्ट’ करने की कोशिश कर रही है। इसे अस्वीकार्य बताते हुए द्रमुक अध्यक्ष ने कहा कि किसी भाषा को थोपने के परिणाम दुनिया के इतिहास को देखकर समझे जा सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘संविधान की 8वीं अनुसूची में सूचीबद्ध तमिल सहित सभी भारतीय भाषाएं भारत की राष्ट्रीय भाषाएं हैं।’’ स्टालिन के अनुसार, यह दावा करना कि संस्कृत भारत की मूल भाषा है, ‘‘हमें गुलाम बनाने का प्रयास है।’’ उन्होंने कहा कि अगर संस्कृत को मूल भाषा के रूप में लिया जाता है, तो इसका मतलब है कि अन्य सभी भाषाओं की उत्पत्ति केवल इसी से हुई है। ‘‘मतलब वे यह स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं कि भारत की सभी भाषाओं की जड़ें संस्कृत में हैं।’’ उन्होंने कहा कि यह भाषाविद् रॉबर्ट कैलडवेल ही थे जिन्होंने 175 साल पहले अपने अध्ययन के माध्यम से दुनिया को बताया था कि तमिल सहित द्रविड़ भाषाओं की अपनी अनूठी विशेषताएं हैं।

Similar Post

LIFESTYLE

AUTOMOBILES

Recent Articles

Facebook Like

Subscribe

FLICKER IMAGES

Advertisement