भारत औपनिवेशिक मानसिकता त्याग रहा है: धनखड़
नई दिल्ली, सोमवार, 04 नवंबर 2024। उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने लोक प्रशासन में प्रौद्योगिकी को अपनाने, इसे समावेशी बनाने और 'अंत्योदय' से प्रेरित होने पर जोर देते हुए सोमवार को कहा कि भारत औपनिवेशिक मानसिकता त्याग रहा है। धनखड़ ने यहां भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की आम सभा की 70वीं वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत तेजी से औपनिवेशिक मानसिकता को त्याग रहा है। औपनिवेशिक विचारों को चुनौती दी रही है। उन्होंने कहा, 'भारतीय लोक प्रशासन में भारतीय विशेषताएं होनी चाहिए जो औपनिवेशिक मानसिकता से दूर हो और स्वतंत्रता के बाद हमारी आकांक्षाओं के अनुरूप हो।'उन्होंने कहा कि अब पहले के औपनिवेशिक विचारों और प्रतीकों को चुनौती दी जा रही है। उन्होेंने कहा, 'किंग्स वे' अब 'कर्त्तव्य पथ' बन गया है और 'रेस कोर्स रोड' 'लोक कल्याण मार्ग' बन गया है। नेताजी अब उस छत्र पर खड़े हैं जहां कभी किंग जॉर्ज की प्रतिमा हुआ करती थी। भारतीय नौसेना के ध्वज में हमारा तिरंगा शामिल कर दिया गया। औपनिवेशिक काल के 1500 कानून अब कानून की किताब में नहीं हैं। नए आपराधिक कानून - भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम - ने भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली को औपनिवेशिक विरासत से मुक्त कर दिया है।
उप राष्ट्रपति ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी बदलाव है कि 'दंड' संहिता अब 'न्याय' संहिता बन गई है, जो पीड़ितों के हितों की रक्षा करने, अभियोजन को कुशलतापूर्वक चलाने और कई अन्य पहलुओं के लिए सुधार ला रही है। भारत तेजी से औपनिवेशिक मानसिकता को त्याग रहा है। अब चिकित्सा या तकनीक सीखने के लिए अंग्रेजी की आवश्यकता नहीं है। धनखड़ ने कहा कि सरकारी अधिकारियों के बीच सॉफ्ट स्किल्स, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और सांस्कृतिक क्षमता विकसित करना महत्वपूर्ण है ताकि अधिकारी हाशिए पर पड़े और वंचित लोगों के संघर्षों को समझ सकें। ऐसी नीतियों को डिजाइन और लागू कर सकें जो वास्तव में उन चुनौतियों का समाधान करें। उन्होेंने लोक सेवकों की समस्या-समाधान क्षमताओं को बढ़ाने और नैतिक नेतृत्व को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नैतिक मानक हमारी सभ्यता के लिए मौलिक हैं।
लोक प्रशासन में प्रौद्योगिकी अपनाने के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अनुसंधान पहलों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जबकि सार्वजनिक सेवा वितरण में उनके नैतिक और जिम्मेदार कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना चाहिए। प्रभावी लोक प्रशासन की आधारशिला निरंतर सीखना और क्षमता निर्माण है। धनखड़ ने कहा कि प्रौद्योगिकी को अपनाने के साथ-साथ हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि इससे और अधिक विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए। तेजी से आगे बढ़ती प्रौद्योगिकी समाज के सबसे कमजोर वर्गों को बाहर कर सकती है। इसलिए दृष्टिकोण समावेशी और 'अंत्योदय' से प्रेरित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि डेटा को हमारी निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सबसे आगे होना चाहिए। विभिन्न कल्याणकारी नीतियों के प्रभाव को समझने के लिए साक्ष्य आधारित अध्ययन आवश्यक हैं।
महिला आरक्षण विधेयक के पारित होने की सराहना करते हुए श्री धनखड़ ने कहा कि यह निर्णय न केवल महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को स्वीकार करता है, बल्कि सामाजिक न्याय के एक गहन पहलू को भी पूरा करता है। नीति निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सहानुभूतिपूर्ण और संवेदनशील शासन को बढ़ावा देगी। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत मेलों और त्यौहारों का देश है, लेकिन इन समारोहों में कभी-कभी ऐसी दुर्घटनाएँ हो जाती हैं जिन्हें टाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर जिला प्रशासन को संवेदनशील बनाने में की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उचित पूर्वानुमान उपायों और अग्रिम योजना के साथ, विशेष रूप से सुविधाओं और सुरक्षा के संबंध में, ऐसी घटनाओं को कम किया जा सकता है।
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