एनसीआर में मादक पदार्थ लैब का भंडाफोड़, तिहाड़ जेल के वार्डन समेत पांच गिरफ्तार

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नई दिल्ली, मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024। नोएडा में मेक्सिको के एक मादक पदार्थ गिरोह से जुड़ी एक मेथम्फेटामाइन (एक किस्म का मादक पदार्थ) लैब का भंडाफोड़ कर तिहाड़ जेल के वार्डन और दिल्ली के दो व्यापारियों सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। एनसीबी ने एक बयान में बताया कि उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के कासना औद्योगिक इलाके में 25 अक्टूबर को एक मादक पदार्थ लैब का भंडाफोड़ कर वहां से तरल एवं ठोस स्वरूप में लगभग 95 किलोग्राम मेथम्फेटामाइन बरामद की गई। बयान के मुताबिक, “चूंकि, मादक पदार्थ गिरोह का नेटवर्क राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कई इलाकों में फैला हुआ है”, इसलिए एनसीबी ने दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ को भी छापेमारी में शामिल किया था।

एनसीबी के उपमहानिदेशक (संचालन) ज्ञानेश्वर सिंह ने बताया, “शुरुआती पूछताछ से पता चला है कि छापेमारी के दौरान लैब में मौजूद दिल्ली के एक व्यवसायी और तिहाड़ जेल के वार्डन ने अवैध इकाई की स्थापना, विभिन्न स्रोतों से मादक पदार्थ के उत्पादन के लिए जरूरी रसायनों की खरीद और मशीनों के आयात में “महत्वपूर्ण” भूमिका निभाई थी।” सिंह के अनुसार, मेथम्फेटामाइन के उत्पादन के लिए इन लोगों ने मुंबई के एक ‘केमिस्ट’ को नियुक्त किया था। उन्होंने बताया कि मादक पदार्थ की गुणवत्ता की जांच का जिम्मा मेक्सिको के एक मादक पदार्थ गिरोह के सदस्य को सौंपा गया था, जो दिल्ली में रहता है।

सिंह के मुताबिक, इन चारों लोगों को 27 अक्टूबर को दिल्ली की विशेष स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिसने उन्हें तीन दिन की एनसीबी हिरासत में भेज दिया। उन्होंने बताया कि बाद में गिरोह के एक “महत्वपूर्ण सदस्य” और दिल्ली के गिरफ्तार व्यवसायी के “करीबी सहयोगी” को राजौरी गार्डन इलाके से पकड़ा गया। उसकी हिरासत के लिए अदालत का रुख किया गया है।

एनसीबी के अनुसार, दिल्ली के व्यवसायी को पहले राजस्व खुफिया विभाग (डीआरआई) ने एनडीपीएस के एक अलग मामले में गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने बताया कि व्यवसायी को तिहाड़ जेल में रखा गया था, जहां वह वार्डन के संपर्क में आया, जो बाद में उसका “सहयोगी” बन गया। एनसीबी ने कहा कि मामले से जुड़े मेक्सिको के मादक पदार्थ गिरोह की पहचान ‘कार्टेल डि जालिस्को नुएवा जनरेशियन (सीजेएनजी)’ के रूप में हुई है।

एजेंसी ने बताया कि लैब से एसीटोन, सोडियम हाइड्रॉक्साइड, मेथिलीन क्लोराइड, उच्च गुणवत्ता का इथेनॉल, टोल्यूईन, लाल फास्फोरस, इथाइल एसीटेट जैसे रसायन और मादक पदार्थ के उत्पादन के लिए आयातित मशीन जब्त की गई है। सिंह ने कहा कि अब गिरोह से जुड़े अन्य तारों के साथ ही मादक पदार्थ की तस्करी से अर्जित धनराशि और संपत्ति का पता लगाया जा रहा है। एनसीबी ने इस साल अब तक मादक पदार्थ की पांच अवैध लैब का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। इनमें गुजरात के गांधीनगर और अमरेली, राजस्थान के जोधपुर और सिरोही तथा मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित लैब शामिल है।

भोपाल में एनसीबी और गुजरात आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने बगरोदा औद्योगिक इलाके में एक संयुक्त अभियान चलाया था और मशीनों के साथ लगभग 907 किलोग्राम मेफेड्रोन और 7,000 किलोग्राम अन्य रसायन जब्त किए थे। एनसीबी का मानना है कि मेथम्फेटामाइन और मेफेड्रोन जैसे मादक पदार्थों के उत्पादन की कम लागत को देखते हुए ड्रग माफिया औद्योगिक क्षेत्रों में तेजी से गोपनीय लैब स्थापित कर रहे हैं, ताकि कच्चे माल और उपकरणों के नियमित परिवहन, लैब में उत्पन्न कचरे और रासायनिक प्रसंस्करण के दौरान चिमनी से निकलने वाले जहरीले धुएं से स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां ​​सतर्क न हों।

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