मौजूदा अपूर्ण कानून पर्याप्त नहीं, एक समग्र जलवायु कानून की जरूरत है: पूर्व न्यायाधीश हिमा कोहली

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नई दिल्ली, शनिवार, 28 सितम्बर 2024। उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत न्यायाधीश न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने एक मजबूत राष्ट्रीय जलवायु कानून की वकालत करते हुए कहा कि मौजूदा पर्यावरण कानून अक्सर अपूर्ण होते हैं तथा जलवायु परिवर्तन की जटिलताओं से निपटने में अपर्याप्त हैं। न्यायमूर्ति कोहली ने शुक्रवार को ‘‘जलवायु दायित्व, न्याय और विधिशास्त्र’ विषयक एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि एम के रंजीत सिंह मामले में शीर्ष अदालत का ऐतिहासिक फैसला भारत के पर्यावरण कानूनों को मजबूत करने और जलवायु चर्चाओं में मानवाधिकारों को शामिल करने का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन के प्रति विशेष रूप से समर्पित एक व्यापक कानून की सख्त जरूरत है। भारत में कई पर्यावरण कानून तो हैं, लेकिन वे अक्सर अपूर्ण होते हैं और कभी-कभी जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न बहुआयामी चुनौतियों से निपटने में अपर्याप्त पाये जाते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरी दृष्टि में संवैधानिक सिद्धांतों पर आधारित और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप एक मजबूत राष्ट्रीय जलवायु कानून ही आगे का मार्ग है।’’

न्यायमूर्ति कोहली ने कहा कि ऐसे कानून में जलवायु अनुकूलन और आपदा के दौरान कम से कम नुकसान सुनिश्चित करने के प्रावधान, राज्य और राज्येत्तर तत्वों को जवाबदेह ठहराने के लिए तंत्र और जलवायु संबंधी आपदाओं से प्रभावित समुदायों को मुआवजा देने के तौर-तरीके शामिल होने चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून में असुरक्षित आबादी को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि उन्हें संसाधनों, कानूनी उपायों और जलवायु प्रभावों से सुरक्षा सुलभ हो। न्यायमूर्ति कोहली ने कहा, ‘‘पर्यावरण की सुरक्षा के हित में मौजूदा कानूनों की व्यापक व्याख्या जारी रखते हुए, न्यायपालिका अपने आदेशों के माध्यम से ऐसे कानून बनाने की सिफारिश कर सकती है और ... ठोस निर्देशों के साथ फासलों को भर सकती है जैसा कि वह अतीत में करती रही है।’’

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